Supreme Court of India ने कहा — अश्लील कंटेंट की जिम्मेदारी — सरकार, प्लेटफार्म और समाज, सबकी होगी

0

नई दिल्ली, 27  नवम्बर 2025 । इस सप्ताह, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट, ओटीटी और सोशल-मीडिया प्लेटफार्मों पर अश्लील कंटेंट (obscene / vulgar content) की जिम्मेदारी अकेले उपयोगकर्ता या किसी एक व्यक्ति पर नहीं डाली जा सकती है। अदालत ने कहा है कि यदि ऐसे कंटेंट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो रहे हैं, तो उसे नियंत्रित करने के लिए कानून-विधि, प्लेटफार्म और नियामक संस्थाओं को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सोशल मीडिया के कंटेंट पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर डाले जाने वाले एडल्ट कंटेंट के लिए किसी न किसी को जिम्मेदार लेनी ही होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने आज यह टिप्पणी की, इंडियाज गॉट लेटेंट से जुड़े केस में की। इस शो के आपत्तिजन कंटेंट पर विवाद होने के बाद रणवीर अल्लाहबादिया और समय रैना जैसे कई यूट्यूबर्स को सुर्खियों में ला दिया था।

कोर्ट ने कहा कि जब तक गंदा (अश्लील) कंटेंट रोका जाता है, तब तकलाखों लोग देख लेते हैं। केंद्र सरकार इस बारे में 4 हफ्तों में नियम बनाए।

क्यों अहम है यह फैसला
  • यह फैसला समाज में बढ़ती ऑनलाइन सामग्री — चाहे वे वेब-सीरीज हों, सोशल-मीडिया पोस्ट हों, या डिजिटल प्लेटफार्म की अन्य सामग्री — के दायित्व (responsibility) के संदर्भ में एक नया रोडमैप तय करता है।

  • इससे सिर्फ प्लेटफ़ॉर्म को जिम्मेदार ठहराना नहीं बल्कि सरकार, नियामक संस्थाएँ, प्लेटफार्म और अंततः उपयोगकर्ता — सबको जागरुक बनना होगा।

  • जो सामग्री “सिर्फ भाषा या अभिव्यक्ति” समझकर बीन सुपपा छोड़ दी जाती रही है, अब उस पर पुनर्विचार का आग्रह उठ रहा है — जिससे सामाजिक मूल्यों, सुरक्षा और सार्वजनिक नैतिकता को सशक्त संरक्षण मिले।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.