ट्रम्प बोले – अमेरिका में टैलेंटेड लोगों की कमी, देश की प्रगति पर मंडरा रहा संकट

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वॉशिंगटन , 12 नवम्बर 2025 । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर देश की कार्यबल और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अमेरिका में टैलेंटेड और कुशल लोगों की गंभीर कमी हो गई है। उन्होंने दावा किया कि अगर यह स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले वर्षों में देश को आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि देश में कई अहम नौकरियों के लिए पर्याप्त टैलेंटेड लोग नहीं हैं, इसलिए विदेशी स्किल्ड वर्कर्स की जरूरत पड़ती है।

ट्रम्प ने यह बयान फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दिया। एंकर लॉरा इंग्राहम ने ट्रम्प से पूछा कि क्या H-1B वीजा की संख्या कम की जाएगी, क्योंकि इससे अमेरिकी मजदूरों के वेतन पर असर पड़ता है?

ट्रम्प ने जवाब दिया, “हां, मैं सहमत हूं, लेकिन आपको बाहर से टैलेंट भी लाना होगा।”

जब एंकर ने कहा कि अमेरिका में काफी टैलेंटेड लोग हैं, तो ट्रम्प बोले, “नहीं, कुछ खास क्षेत्रों में हमारे पास टैलेंट नहीं है। आप बेरोजगार लोगों को उठाकर मिसाइल फैक्ट्री में नहीं भेज सकते।”

इससे पहले सितंबर में ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीजा की एप्लिकेशन फीस को 100 गुना बढ़ाकर 1 हजार डॉलर से 1 लाख डॉलर कर दिया है।

विदेशी छात्रों पर ट्रम्प का यू टर्न

विदेश छात्रों को लेकर अपने रुख में यू-टर्न लिया है। ट्रम्प ने कहा है कि विदेशी छात्रों को अमेरिका में पढ़ाई की अनुमति मिलती रहनी चाहिए, क्योंकि वे न सिर्फ देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं बल्कि विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति को भी संभालते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर चीन और दूसरे देशों से आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या घटाई गई, तो अमेरिका के करीब आधे कॉलेजों के बंद होने की नौबत आ जाएगी।

ट्रम्प ने कहा कि दुनियाभर से आने वाले आधे छात्रों को नहीं रोक सकते, ऐसा किया तो हमारे कॉलेज-यूनिवर्सिटी सिस्टम को भारी नुकसान होगा। मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं मानता हूं कि बाहर के देशों से छात्रों का आना अच्छा है, मैं दुनिया से रिश्ते बेहतर रखना चाहता हूं।

ट्रम्प का यह बयान न केवल अमेरिका की वर्तमान कार्यबल स्थिति पर प्रकाश डालता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि देश को शिक्षा, नवाचार और इमिग्रेशन नीति में सुधार की सख्त जरूरत है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा चुनावी एजेंडा बन सकता है।

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