UPSC में लेटरल एंट्री को लेकर छिड़ी बहस: केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान
नई दिल्ली, 20अगस्त। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में लेटरल एंट्री को लेकर चल रही बहस ने भारतीय राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। इसी बीच, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि लेटरल एंट्री को लेकर कांग्रेस पार्टी देश को गुमराह कर रही है।
अश्विनी वैष्णव ने अपने बयान में कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सभी लोग लेटरल एंट्री के माध्यम से ही महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किए गए थे। ऐसे में कांग्रेस का लेटरल एंट्री का विरोध करना तर्कसंगत नहीं है।
लेटरल एंट्री का तात्पर्य है कि विशेषज्ञता और अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को सीधे प्रशासनिक सेवाओं में शामिल किया जाए, बिना UPSC परीक्षा के पारंपरिक तरीके को अपनाए। यह प्रक्रिया उन क्षेत्रों में विशेषज्ञता की आवश्यकता को पूरा करने के लिए की जाती है जहां पारंपरिक प्रशासनिक अधिकारियों का अनुभव कम होता है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं, उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता और चयन की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि लेटरल एंट्री से प्रशासनिक सेवाओं में विशेषज्ञता और दक्षता में इजाफा होगा, जो कि विकासशील भारत के लिए आवश्यक है।
अश्विनी वैष्णव ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस द्वारा लेटरल एंट्री पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है और उन्होंने इसे देशहित के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञता और अनुभव की आवश्यकता है, और लेटरल एंट्री उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह बहस अब राजनीतिक गलियारों से होते हुए देश के जनमानस में भी गूंज रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों के बीच क्या रुख अपनाया जाता है और इसका प्रशासनिक ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ता है।