राधा अष्टमी: जब प्रेम पाने का नहीं, स्वयं को मिटाने का नाम बन जाता है
राधा अष्टमी केवल राधा जी के जन्मोत्सव का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम के उस शुद्ध स्वरूप को समझने का अवसर है, जहाँ ‘मैं’ मिटकर ‘तुम’ शेष रह जाते हैं। राधा-कृष्ण का प्रेम हमें समर्पण, विरह, भक्ति और निष्काम प्रेम का गहरा अर्थ समझाता है।
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