तेल अवीव,02 नवंबर 2026 | इजराइल में हाल ही में हुए आम चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के बीच गठबंधन सरकार बनने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने आइजनकोट के साथ एकता सरकार बनाने और प्रधानमंत्री पद के लिए रोटेशन व्यवस्था की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
इजराइली मीडिया संस्थान Ynet की रिपोर्ट के अनुसार, बंद कमरे में हुई चर्चा के दौरान नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या वह आइजनकोट के साथ ऐसी सरकार बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसमें दोनों नेता बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनें। इस पर नेतन्याहू ने कथित तौर पर कहा, “हम हर विकल्प पर विचार कर रहे हैं। मैं किसी भी विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहा हूं।” हालांकि, उनके करीबी सहयोगियों ने स्पष्ट किया कि अभी एकता सरकार बनाने का कोई औपचारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है।
यही वजह है कि नेतन्याहू ने आइजेनकोट के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज नहीं किया है। हालांकि, आइजेनकोट ने अब तक इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
दरअसल, जॉइंट लिस्ट और राअम जैसी अरब पार्टियों ने रविवार को आइजनकोट को समर्थन देने का ऐलान किया था। इस समर्थन के बाद आइजनकोट को 67 सांसदों का साथ मिलने की संभावना है।
इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था। 120 सदस्यों वाली संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत है।
आइजनकोट के साथ रोटेशन पर क्या है नेतन्याहू का रुख?
Ynet की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने निजी बातचीत में प्रधानमंत्री पद के रोटेशन समझौते की संभावना खुली रखी है। इस व्यवस्था के तहत एक तय अवधि तक नेतन्याहू और फिर आइजनकोट प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
हालांकि, सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से ऐसी व्यवस्था का समर्थन नहीं किया है। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि नेतन्याहू केवल आधे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बनने पर सहमत नहीं होंगे। इसके बावजूद नेतन्याहू की निजी टिप्पणी को गठबंधन राजनीति में एक संभावित बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
आइजनकोट की राह में भी कई राजनीतिक चुनौतियां
दूसरी ओर, आइजनकोट का खेमा फिलहाल नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने के बजाय उनके नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से हटाने और वैकल्पिक गठबंधन तैयार करने की कोशिश कर रहा है। आइजनकोट ने चुनाव के दौरान नेतन्याहू के साथ सरकार नहीं बनाने का रुख अपनाया था।
अरब दलों के समर्थन से आइजनकोट के नेतृत्व में सरकार बनाने की संभावना भी सामने आई है। हालांकि, इस विकल्प को लेकर विपक्षी गठबंधन के भीतर मतभेद हैं। कुछ नेता अरब दलों के समर्थन के पक्ष में हैं, जबकि अविगदोर लिबरमैन जैसे नेताओं ने ऐसे गठबंधन पर आपत्ति जताई है।
राष्ट्रपति हर्जोग शुरू करेंगे सरकार गठन की प्रक्रिया
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग 4 नवंबर से चुनाव में जीतने वाले दलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू कर सकते हैं। इस दौरान राजनीतिक दल बताएंगे कि वे किस नेता को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश करते हैं।
जिस नेता को राष्ट्रपति सरकार बनाने का जिम्मा सौंपेंगे, उसे शुरुआत में 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दी जा सकती है। यदि कोई भी नेता बहुमत जुटाने में सफल नहीं होता, तो इजराइल में फिर से चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।
फिलहाल नेतन्याहू और आइजनकोट के बीच संभावित एकता सरकार की चर्चा केवल विकल्पों के स्तर पर है। किसी औपचारिक समझौते या गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है। आने वाले दिनों में राष्ट्रपति के साथ होने वाली बैठकों और दलों के बीच बातचीत से इजराइल की अगली सरकार की तस्वीर साफ हो सकती है।