नैनीताल, 31 अक्टूबर 2026 | उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर स्थित पुछड़ी गांव में वन विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को बड़ा अभियान चलाया गया। सुबह करीब पांच बजे प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम बुलडोजर और जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के लिए 14 सेक्टर बनाए गए और अलग-अलग स्थानों पर मशीनें लगाई गईं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी की कंपनियां तैनात की गईं।
प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य वन विभाग की आरक्षित भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है। अभियान से पहले संबंधित लोगों को नोटिस दिए गए थे और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ध्वस्तीकरण शुरू किया गया।
पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है, पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। वन विभाग, प्रशासन व पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 15 हेक्टेयर भूमि से अतिक्रमण हटाया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार कार्रवाई के लिए सात जोन व 14 सेक्टर बनाए गए हैं। इन सेक्टर में अतिक्रमण हटाने के लिए 14 जेसीबी मंगाई गई है। प्रशासन शुक्रवार से इस अभियान में जुटा हुआ था।
15 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की तैयारी
रामनगर के तराई पश्चिमी वन प्रभाग के पुछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण के मामले सामने आ रहे थे। विभाग ने चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की योजना बनाई है। मौजूदा अभियान के लिए करीब 15 हेक्टेयर वन भूमि को चिह्नित किया गया था।
हालांकि, शनिवार की कार्रवाई के दौरान अलग-अलग रिपोर्टों में अभियान के तत्काल दायरे को लेकर अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में करीब पांच हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का उल्लेख है, जबकि अन्य में 14 से 15 हेक्टेयर भूमि को अभियान का लक्ष्य बताया गया है।
82 मकानों पर कार्रवाई, कुछ भवनों को मिली राहत
प्रशासन ने पुछड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण के रूप में चिह्नित निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 82 मकानों को हटाने की कार्रवाई की गई। इससे पहले 92 भवनों को चिह्नित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से कुछ मामलों में न्यायालय में सुनवाई लंबित होने के कारण फिलहाल कार्रवाई नहीं की जानी थी।
अधिकारियों के अनुसार, संबंधित लोगों को पहले ही जमीन खाली करने का समय दिया गया था। कार्रवाई शुरू होने से पहले कुछ परिवारों ने अपना सामान हटाया और कुछ लोगों ने खुद ही निर्माण तोड़ने शुरू कर दिए थे।
525 पुलिसकर्मी और तीन कंपनी पीएसी तैनात
अभियान के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को दो सुपर जोन, सात जोन और 14 सेक्टर में बांटा। तीन कंपनी पीएसी समेत करीब 525 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
सुरक्षा व्यवस्था में पांच एसपी स्तर के अधिकारी, छह क्षेत्राधिकारी, 25 निरीक्षक और 82 उपनिरीक्षक सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी अभियान में मौजूद रहे।
इसके अलावा छह स्थानों पर बैरियर लगाए गए। ड्रोन से निगरानी, अग्निशमन दल, बम निरोधक दस्ता, दंगा नियंत्रण टीम, आंसू गैस दस्ता और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी तैयार रखा गया।
तीन किलोमीटर के दायरे में आवाजाही पर प्रतिबंध
अभियान को देखते हुए पुछड़ी क्षेत्र के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। कार्रवाई स्थल के करीब तीन किलोमीटर के दायरे में अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगाई गई। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से बचें और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश भी लागू किए गए। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश और अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
पिछले साल भी हटाया गया था अतिक्रमण
पुछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पहली बार नहीं हो रही है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी प्रशासन ने अभियान चलाकर कई निर्माण ध्वस्त किए थे। उस समय 51 से अधिक भवनों पर कार्रवाई किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
वन विभाग का कहना है कि आरक्षित वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना उसकी जिम्मेदारी है। वहीं, मौजूदा अभियान के दौरान प्रभावित परिवारों और निर्माणों की संख्या को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में अलग आंकड़े दिए गए हैं। अंतिम स्थिति प्रशासन और वन विभाग की आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट होगी।