जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसा: कैप्टन हिमांशु सभरवाल समेत 6 की मौत, दिल्ली से था खास कनेक्शन

0

जोशीमठ, 31 अक्टूबर 2026 | उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने छह परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को बद्रीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड जा रहा एक निजी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में हेलीकॉप्टर उड़ा रहे 48 वर्षीय कैप्टन हिमांशु सभरवाल भी शामिल थे।

हादसे के बाद जब कैप्टन हिमांशु की पहचान सामने आई तो दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में रहने वाले उनके परिवार और पड़ोसियों में शोक छा गया। हिमांशु मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले थे और ट्रांस भारत एविएशन कंपनी में पायलट के रूप में काम कर रहे थे।

हादसे में कैप्टन हिमांशु सभरवाल के साथ-साथ कर्नाटक के 41 वर्षीय प्रताप की भी मौत हुई है। इनके अलावा कर्नाटक के ही 44वर्षीय अरुण सालुंके, 39 वर्षीय वीबी शंकर गौड़ा, 50 वर्षीय सुधीर के. और 51 वर्षीय एचएस. नटराजा भी मृतकों में शामिल रहे। इनकी बॉडी को जंगल वाले इलाके से लाया जा रहा है।

कौन थे कैप्टन हिमांशु सभरवाल?

कैप्टन हिमांशु सभरवाल 48 वर्ष के थे और दिल्ली के शालीमार बाग इलाके से उनका संबंध था। वह निजी विमानन कंपनी ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर VT-HCX को उड़ा रहे थे। हादसे के वक्त हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड की ओर जा रहा था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हिमांशु के माता-पिता पिछले करीब 35 वर्षों से शालीमार बाग में रह रहे हैं। परिवार में उनके माता-पिता और छोटे भाई कुणाल सभरवाल हैं। उनके भाई पेशे से वकील बताए गए हैं।

पड़ोसी बोले- जिंदादिल इंसान थे हिमांशु

हिमांशु के निधन की खबर से उनके पड़ोसी भी बेहद दुखी हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पड़ोसी राकेश ग्रोवर ने उन्हें जिंदादिल और रौबदार व्यक्तित्व वाला इंसान बताया। उन्होंने कहा कि हिमांशु महीने में कभी-कभार शालीमार बाग आते थे, लेकिन उनसे मुलाकात हमेशा यादगार रहती थी।

पड़ोसी के अनुसार, हिमांशु के पिता उनके सेना से जुड़े अनुभवों का जिक्र करते थे। इलाके के कुछ लोग उन्हें ‘कर्नल’ कहकर भी बुलाते थे। हालांकि, उनके सैन्य करियर और आधिकारिक पद से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

बद्रीनाथ से उड़ान भरने के कुछ देर बाद टूटा संपर्क

जानकारी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर ने शुक्रवार दोपहर करीब 1:12 से 1:14 बजे के बीच बद्रीनाथ से उड़ान भरी थी। इसके कुछ ही समय बाद जोशीमठ घाटी के ऊपर विमान का रेडियो संपर्क टूट गया और ट्रैकिंग सिस्टम से भी उसकी लोकेशन मिलनी बंद हो गई।

बाद में हेलीकॉप्टर का मलबा चमोली जिले के चाई गांव के पास पहाड़ी क्षेत्र में मिला। दुर्घटनास्थल दुर्गम होने के कारण राहत और बचाव दल को शवों को बाहर निकालने में कठिनाई हुई। सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाया।

पांचों यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे

हेलीकॉप्टर में कैप्टन हिमांशु के अलावा पांच यात्री सवार थे। इनकी पहचान कर्नाटक के रहने वाले प्रताप, अरुण सालुंके, वीबी शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराज के रूप में हुई।

इनमें अरुण सालुंके बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर थे। हादसे में सभी छह लोगों की जान चली गई। अधिकारियों ने सभी शव बरामद किए जाने की पुष्टि की।

हादसे की वजह अभी स्पष्ट नहीं, कंपनी का पूरा बेड़ा ग्राउंडेड

हादसे के पीछे खराब मौसम और कम दृश्यता की आशंका जताई गई है। हालांकि, दुर्घटना का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

एहतियात के तौर पर उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने ट्रांस भारत एविएशन के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को ग्राउंडेड कर दिया है। दुर्घटना की परिस्थितियों, तकनीकी स्थिति और मौसम से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

जोशीमठ का यह हादसा एक बार फिर चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा और कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ान संचालन से जुड़े जोखिमों पर सवाल खड़े करता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.