नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026| भारत में काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Ernst & Young US LLP (EY US) की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयकर विभाग से जवाब मांगा है। विवाद भारतीय इकाइयों द्वारा अमेरिका स्थित कंपनी को कर्मचारियों की तैनाती के बदले किए गए भुगतान पर टैक्स लगाने से जुड़ा है।
मामले का मुख्य सवाल यह है कि क्या विदेश से भारत भेजे गए कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों की प्रतिपूर्ति को तकनीकी सेवाओं के बदले भुगतान माना जा सकता है। यदि ऐसा माना जाता है, तो संबंधित रकम पर भारत में कर लग सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक के पांच आकलन वर्षों से संबंधित है। EY US के कर्मचारियों को अस्थायी रूप से भारत स्थित समूह कंपनियों में काम करने के लिए भेजा गया था। भारतीय इकाइयां इन कर्मचारियों से जुड़े खर्चों की रकम अमेरिकी कंपनी को वापस करती थीं।
EY US का पक्ष है कि ये भुगतान कर्मचारियों पर हुए वास्तविक खर्च की प्रतिपूर्ति हैं, न कि तकनीकी सेवाओं से हुई कमाई। कंपनी ने इस वर्गीकरण को चुनौती दी है।
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने पहले EY US को राहत दी थी। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने 18 जून 2026 के अपने फैसले में कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े भुगतान को तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क माना। अदालत के अनुसार, कर्मचारियों के माध्यम से भारतीय इकाइयों को तकनीकी ज्ञान और कौशल उपलब्ध कराया गया था।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट अब इस कानूनी सवाल की जांच करेगा कि भारत-अमेरिका दोहरे कराधान से बचाव समझौते के तहत ऐसे भुगतान कर योग्य हैं या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर 2026 को होने की जानकारी सामने आई है।
इस फैसले पर आईटी, कंसल्टिंग और अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नजर रहेगी। हालांकि, अंतिम निर्णय आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।