देहरादून, उत्तराखंड, 26 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड हिमालय के नीचे मौजूद मेन हिमालयन थ्रस्ट (MHT) को लेकर एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने भूकंप के दीर्घकालिक जोखिम पर ध्यान आकर्षित किया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस फॉल्ट का लगभग 115 किलोमीटर चौड़ा हिस्सा मजबूती से लॉक है, जिसके कारण धरती की चट्टानों में टेक्टोनिक तनाव जमा हो सकता है।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) के आंकड़ों और जापान के ALOS-2 सैटेलाइट से प्राप्त रडार तस्वीरों का विश्लेषण किया। शोध के अनुसार, फॉल्ट पर स्लिप की कमी लगभग 18 मिलीमीटर प्रति वर्ष आंकी गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में जमीन का ऊर्ध्वाधर उठाव 4 से 6 मिलीमीटर सालाना दर्ज किया गया।
शोधकर्ताओं के आकलन के मुताबिक, लगभग 300 किलोमीटर लंबे अध्ययन क्षेत्र में जमा तनाव की दर की ऊर्जा-समतुल्यता करीब हर 100 साल में 8.1 तीव्रता के भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा के बराबर हो सकती है। यह अनुमान तनाव के संचय को दर्शाता है, न कि किसी निश्चित समय पर भूकंप आने की भविष्यवाणी को।
उत्तराखंड मध्य हिमालय के भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र में स्थित है। विशेषज्ञों के निष्कर्ष मजबूत निगरानी, सुरक्षित भवन निर्माण और आपदा तैयारी के महत्व को रेखांकित करते हैं।