देहरादून, 24 अक्टूबर 2026 | उत्तराखंड के प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने भारतीय वन सेवा (IFS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS लेने का फैसला किया है। 23 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने इसके लिए शासन को आवेदन भेजा और सोशल मीडिया पर भी अपने निर्णय की जानकारी साझा की। वर्ष 2008 बैच के IFS अधिकारी बडोला ने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए हैं। उनकी सामान्य सेवानिवृत्ति वर्ष 2037 में होनी थी, यानी वह निर्धारित समय से करीब 11 साल पहले सेवा छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
साकेत बडोला मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार के रहने वाले साकेत वर्ष 2008 बैच के आईएफएस रहे हैं। वन विभाग में आने से पहले वह पशु चिकित्सक थे। तराई पश्चिमी वन प्रभाग में वह वर्ष 2009 में प्रशिक्षु डीएफओ भी रहे हैं। इसके बाद वह कार्बेट टाइगर रिजर्व में उपनिदेशक के पद पर रहे। वे भारत में वन्य जीव तस्करी की रोकथाम के लिए बनी ट्रैफिकिंग सेल के मुखिया भी रहे।
कौन हैं डॉ. साकेत बडोला?
डॉ. साकेत बडोला भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार क्षेत्र के रहने वाले हैं। वन विभाग में आने से पहले वह पशु चिकित्सक के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्ष 2008 बैच में IFS में चयन के बाद उन्होंने वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी संभाली।
उनके करियर में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक, वन्यजीव तस्करी की रोकथाम से जुड़ी ट्रैफिकिंग सेल के प्रमुख और राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक जैसे पद शामिल रहे हैं। जुलाई 2024 में उन्हें दोबारा कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक की जिम्मेदारी मिली थी। पिछले वर्ष उन्हें मुख्य वन संरक्षक (Chief Conservator of Forests) के पद पर पदोन्नति भी मिली थी।
सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा?
साकेत बडोला ने अपनी पोस्ट में बताया कि कई महीनों तक गंभीरता से विचार करने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से भारतीय वन सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का निर्णय किया है।
उन्होंने अपने लंबे सेवाकाल को संतोषजनक बताते हुए कहा कि उन्हें जनता की सेवा करने और प्रकृति तथा वन्यजीव संरक्षण में योगदान देने के अवसर मिले। उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों, सहकर्मियों, परिवार, मित्रों और आम लोगों के सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।
बडोला ने यह भी संकेत दिया कि सेवा से अलग होने के बाद वह भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण और समाज के लिए अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देने का प्रयास करेंगे।
डॉ. साकेत बडोला की सामान्य सेवानिवृत्ति वर्ष 2037 में होनी थी। ऐसे में उनका VRS लेने का निर्णय चर्चा में है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी विवाद, विभागीय कार्रवाई या अन्य घटना को इसका कारण नहीं बताया है। उन्होंने केवल व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है।
इसलिए उनके फैसले के पीछे किसी विशेष विवाद या घटना को जिम्मेदार ठहराना फिलहाल उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, शासन को आवेदन भेजा गया है; VRS की औपचारिक मंजूरी की स्थिति अलग से स्पष्ट होना जरूरी है।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में निभाई अहम जिम्मेदारी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व भारत के प्रमुख बाघ संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है। यहां वन्यजीव संरक्षण, बाघों की निगरानी, जंगलों का प्रबंधन और पर्यटन गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
डॉ. बडोला ने कॉर्बेट के निदेशक के रूप में इन प्रशासनिक और संरक्षण संबंधी जिम्मेदारियों को संभाला। उनके VRS आवेदन के बाद अब वन विभाग में आगे के प्रशासनिक बदलावों पर नजर रहेगी। हालांकि, नए निदेशक की नियुक्ति या कार्यभार हस्तांतरण को लेकर आधिकारिक घोषणा की पुष्टि होने तक किसी नाम को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।
अब साकेत बडोला के VRS आवेदन पर शासन के निर्णय का इंतजार है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया पूरी होने और आदेश जारी होने के बाद ही उनकी सेवा से विदाई की औपचारिक स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल उनके सार्वजनिक बयान में व्यक्तिगत कारणों का ही उल्लेख है और आगे की भूमिका के बारे में कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।