हरिद्वार, उत्तराखंड, 22 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा स्नान करने पहुंच रहे श्रद्धालुओं को इन दिनों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के प्रसिद्ध हर की पौड़ी घाट पर गंगा का जलस्तर काफी कम हो गया है। इसके कारण कई श्रद्धालु अपनी इच्छा के अनुसार गंगा में डुबकी नहीं लगा पा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऊपरी गंगनहर को वार्षिक सफाई और मरम्मत के लिए बंद किया गया है। यह बंदी 20 अक्टूबर की रात से प्रभावी हुई और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 नवंबर की मध्यरात्रि के आसपास नहर में पानी का प्रवाह दोबारा शुरू किया जाना है।
क्यों कम हुआ गंगा का जलस्तर?
हरिद्वार से उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली ऊपरी गंगनहर में हर साल रखरखाव के लिए पानी का प्रवाह रोका जाता है। इस दौरान नहर की सफाई, गाद हटाने और जरूरी मरम्मत का काम किया जाता है। आगामी अर्धकुंभ की तैयारियों से जुड़े कुछ कार्य भी किए जा रहे हैं।
नहर बंद होने का असर हर की पौड़ी पर दिखाई दे रहा है। स्नान और पूजा-पाठ के लिए पहुंचे लोगों को अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है। कुछ श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान पूरे करने के लिए उपलब्ध पानी से ही संतोष करना पड़ रहा है।
स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है असर
हरिद्वार में धार्मिक पर्यटन से घाटों के आसपास के दुकानदारों, फूल-माला विक्रेताओं, प्रसाद कारोबारियों और अन्य छोटे व्यापारियों को रोजगार मिलता है। गंगा स्नान में परेशानी के कारण श्रद्धालुओं की गतिविधियां प्रभावित होने से इन कारोबारियों की कमाई पर भी असर पड़ने की आशंका है।
कब सामान्य होगा जल प्रवाह?
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 7 नवंबर की मध्यरात्रि के आसपास नहर में पानी छोड़े जाने का कार्यक्रम है। हालांकि, हर की पौड़ी पर जलस्तर कब पूरी तरह सामान्य होगा, यह वास्तविक जल प्रवाह और संबंधित विभाग की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
श्रद्धालुओं को हरिद्वार जाने से पहले स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग से ताजा जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।