फेसबुक-इंस्टाग्राम पर सरकार सख्त! Meta को एल्गोरिदम की समीक्षा का निर्देश

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नई दिल्ली,19 अक्टूबर 2026 |  सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी और संवेदनशील घटनाओं से जुड़ी पोस्ट की बढ़ती पहुंच को लेकर केंद्र सरकार ने Meta को अपने कंटेंट रिकमेंडेशन सिस्टम की समीक्षा करने को कहा है। Meta फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म की पैरेंट कंपनी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी को सलाह दी है कि उसके एल्गोरिदम यूजर्स को केवल एक या सीमित तरह के नैरेटिव तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें प्रासंगिक और विश्वसनीय जानकारी के विविध स्रोतों तक पहुंच मिलनी चाहिए। यह सलाह 10 अक्टूबर 2026 को जारी की गई थी और इसकी जानकारी 18-19 अक्टूबर को सार्वजनिक हुई।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय ने मेटा से इंस्टाग्राम और फेसबुक के एल्गोरिदम की समीक्षा करने को कहा है। मंत्रालय ने कहा कि यूजर्स को एकतरफा नैरेटिव वाला कंटेंट मिल रहा है ।

मंत्रालय ने यह सलाह 10 अक्टूबर को जारी की, हालंकि इसकी जानकारी सोमवार को सामने आई। इसमें मेटा से सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने, हिंसा भड़काने या गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली सामग्री पर जांच मजबूत करने को कहा गया है।

दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी ने इसी दिन दिल्ली में प्रदर्शन बुलाया था इस दौरान 7 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया था।

पुरानी तस्वीरों और एडिटेड वीडियो पर भी नजर

सरकार ने खास तौर पर ऐसे कंटेंट का उल्लेख किया है, जिसमें पुरानी या असंबंधित तस्वीरों और वीडियो को मौजूदा घटना बताकर साझा किया जाता है। इसके अलावा, आपातकाल, प्रतिबंध, पुलिस कार्रवाई या सरकारी कदमों को लेकर अपुष्ट दावों पर भी ध्यान देने को कहा गया है।

मंत्रालय चाहता है कि सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी तस्वीरों, वीडियो, ग्राफिक्स और बयानों के साथ पर्याप्त संदर्भ उपलब्ध हो, ताकि यूजर्स सामग्री की तारीख, स्थान और वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझ सकें। यदि कोई पोस्ट तेजी से वायरल होकर भ्रम या हिंसा का जोखिम बढ़ाती है, तो उसकी समय पर समीक्षा की व्यवस्था भी जरूरी बताई गई है।

कानून-व्यवस्था से जुड़े कंटेंट पर विशेष ध्यान

MeitY की सलाह में ऐसे कंटेंट को लेकर सतर्कता बढ़ाने की बात कही गई है, जो हिंसा भड़काने, गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने की आशंका पैदा कर सकता है। सरकार ने Meta से कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अधिकृत सरकारी संस्थाओं के साथ लागू कानूनों के अनुसार समय पर सहयोग करने को भी कहा है।

मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत मध्यस्थ प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों का उल्लेख किया है। कंपनी से सलाह के अनुरूप आवश्यक कदम तत्काल लागू करने और की गई कार्रवाई की जानकारी मंत्रालय को देने को कहा गया है।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच आया निर्देश

यह सलाह ऐसे समय सामने आई है, जब दिल्ली में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शनों से संबंधित सामग्री सोशल मीडिया पर चर्चा में है। हालांकि, मंत्रालय की सलाह में किसी एक खास घटना को इसका प्रत्यक्ष कारण नहीं बताया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने चिंता जताई कि Meta के प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग दृष्टिकोणों को समान रूप से बढ़ावा नहीं मिल रहा और कुछ तरह की सामग्री को एल्गोरिदम अधिक प्रमुखता दे सकते हैं। यह सरकार की ओर से व्यक्त की गई चिंता है; इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि किसी खास राजनीतिक नैरेटिव को जानबूझकर बढ़ावा दिया गया।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी चर्चा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भ्रामक सामग्री रोकना और यूजर्स को विश्वसनीय जानकारी देना एक अहम चुनौती है। वहीं, कंटेंट हटाने या उसकी पहुंच सीमित करने के फैसलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी जरूरी है। डिजिटल अधिकारों से जुड़े पक्षों ने सरकारी सलाह के संदर्भ में सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं।

सरकार ने कहा है कि सलाह के तहत उठाए जाने वाले कदम सूचना प्रौद्योगिकी कानून, संबंधित नियमों और अन्य लागू कानूनों के अनुरूप होने चाहिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Meta अपने रिकमेंडेशन सिस्टम में क्या बदलाव करता है और उन बदलावों से भ्रामक सामग्री पर नियंत्रण तथा अलग-अलग विश्वसनीय विचारों की उपलब्धता पर क्या असर पड़ता है।

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