देहरादून,19 अक्टूबर 2026 । उत्तराखंड में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2023 के निवेश आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर निवेश प्रस्तावों और उनके वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद राज्य सरकार ने सफाई दी है। उद्योग सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव विनय शंकर पांडे ने कहा कि निवेश से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक हैं और प्रत्येक परियोजना का विवरण सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध है। सरकार के अनुसार, समिट के बाद अब तक ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक के निवेश को धरातल पर उतारा जा चुका है।
सचिव उद्योग ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। राज्य का लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है और भारी उद्योगों की स्थापना की संभावनाएं मुख्यतः देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर तथा नैनीताल के कुछ हिस्सों में अधिक हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य की औद्योगिक नीतियां तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान लगभग 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए समय-समय पर ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की गईं। निवेशकों की सहायता के लिए निवेश मित्रों की व्यवस्था की गई, जिन्होंने निवेशकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा, सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में सहयोग किया और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
₹3.56 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर हुए थे समझौते
दिसंबर 2023 में आयोजित उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान लगभग ₹3.56 लाख करोड़ के निवेश समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। सरकार का कहना है कि इन प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए लगातार काम किया गया है।
विनय शंकर पांडे के मुताबिक, निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए समय-समय पर ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की गईं। निवेशकों की मदद के लिए ‘निवेश मित्र’ भी नियुक्त किए गए, ताकि सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ी बाधाओं को दूर किया जा सके और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहायता मिले।
उद्योग सचिव ने स्पष्ट किया कि निवेश से संबंधित जानकारी उद्योग विभाग, यूके स्पाइस और राज्य के सिंगल विंडो सिस्टम पोर्टल पर उपलब्ध है। इन प्लेटफॉर्म पर परियोजनाओं, उनके स्थान और संबंधित विभागों की जानकारी देखी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे आंकड़ों और परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है। सरकार ने मीडिया और अन्य संबंधित लोगों से परियोजना स्थलों का दौरा करने और उद्यमियों से सीधे बातचीत कर निवेश की प्रगति का आकलन करने की अपील भी की है।
छोटे कारोबारियों के निवेश पर भी सरकार का जोर
निवेश की परिभाषा और छोटे कारोबारियों को इसमें शामिल करने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी सरकार ने अपना पक्ष रखा। विनय शंकर पांडे ने कहा कि निवेश का महत्व केवल उसकी रकम से नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले रोजगार और आजीविका के अवसरों से भी आंका जाना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति ₹10,000 लगाकर आटा चक्की या मोबाइल की दुकान शुरू करता है और उससे दो लोगों को रोजगार मिलता है, तो यह भी स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान है। सरकार के मुताबिक, उसकी निवेश नीति का उद्देश्य बड़े उद्योगों के साथ छोटे उद्यमियों और स्थानीय कारोबारियों को भी प्रोत्साहित करना है।
उद्योग सचिव ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति अन्य राज्यों से अलग है। राज्य का लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। उनके अनुसार, बड़े उद्योग स्थापित करने की संभावनाएं मुख्य रूप से देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल के कुछ हिस्सों में केंद्रित हैं।
सरकार का कहना है कि औद्योगिक नीतियां पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखते हुए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं। इसलिए निवेश के आंकड़ों का आकलन करते समय राज्य की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
₹24 हजार करोड़ के अतिरिक्त निवेश की तैयारी
सरकार के अनुसार, राज्य में लगभग ₹24,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश को धरातल पर उतारने की तैयारी चल रही है। विनय शंकर पांडे ने बताया कि इस निवेश से जुड़ी जानकारी भी सिंगल विंडो सिस्टम पर उपलब्ध कराई गई है और जल्द ही चौथी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की जाएगी।
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आंकड़ों पर यह बहस कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना के बाद और तेज हुई। राहुल गांधी ने निवेश प्रस्तावों के वास्तविक क्रियान्वयन, रोजगार सृजन और निवेशकों की सूची को लेकर सवाल उठाए तथा सरकार से पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। इसके जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि परियोजनाओं और निवेश के आंकड़ों का विवरण पहले से सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध है।
इस विवाद में सरकार का पक्ष है कि ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतारा जा चुका है, जबकि विपक्ष ने निवेश के दावों और उनसे पैदा हुए रोजगार की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। निवेश की प्रगति का स्वतंत्र आकलन करने के लिए घोषित प्रस्तावों, शुरू हो चुकी परियोजनाओं, वास्तविक पूंजी निवेश और रोजगार के आंकड़ों को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण होगा।