यूपी CEO का दावा: 85 हजार फॉर्म ऑटो-डिलीट की खबर फेक न्यूज़
लखनऊ, 19 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 85,854 Form-7 को लेकर विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सोशल मीडिया पर वायरल उस दावे को फेक न्यूज बताया है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयोग (ECI) ने 85 हजार से ज्यादा फॉर्म ऑटोमेटिक तरीके से जनरेट कर मतदाताओं के नाम हटाए और इनमें ज्यादातर मुस्लिम मतदाता थे। CEO कार्यालय ने कहा कि उसके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और इस दावे से धार्मिक आधार पर भ्रम फैल सकता है। दूसरी ओर, The Reporters’ Collective की पड़ताल में अधिकारियों द्वारा जमा किए गए फॉर्म में हटाने का कारण दर्ज नहीं होने पर सवाल उठाए गए थे।
खतरनाक मोड़ देने की कोशिश’
उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा के आफीशियल एक्स हैंडल से शेयर की गई पोस्ट में कहा गया है कि, ‘यह एक फर्जी खबर है। उत्तर प्रदेश के सीईओ की ओर से ऐसा कोई बयान कभी नहीं दिया गया है। यह द रिपोर्टर्स कलेक्टिव के पत्रकारों और संपादक की एक रिपोर्ट और कुछ एक्स पोस्ट को एक खतरनाक मोड़ देने की कोशिश है। द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की रिपोर्टों और पोस्ट में कई विसंगतियां, मनगढ़ंत धारणाएं और झूठे आरोप हैं, जिन्हें एक खास तरह की छवि बनाने के इरादे से तैयार किया गया है। लेकिन यह पोस्ट उनकी पिछली गलतियों से भी कहीं आगे की बात है। अगर ऐसी फर्जी खबरों पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे धर्म के आधार पर लोगों के बीच नफरत फैल सकती है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए खतरनाक है। संबंधित अधिकारियों से अनुरोध है कि वे समय रहते उचित कानूनी कदम उठाएं।’
चुनाव आयोग का पक्ष क्या है?
उत्तर प्रदेश के CEO कार्यालय ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई नोटिस, सुनवाई, जांच और दर्ज आदेशों के बाद की गई। कार्यालय ने इस दावे को भी भ्रामक बताया कि 85,854 फॉर्म ऑटोमेटिक तरीके से बिना किसी प्रक्रिया के मतदाताओं के नाम काटने के लिए बनाए गए थे।
यहां दो बातों में अंतर समझना जरूरी है। किसी सॉफ्टवेयर से फॉर्म तैयार होना और मतदाता का नाम अंतिम सूची से हट जाना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसी तरह, किसी फॉर्म में कारण का कॉलम खाली होने का दावा अपने-आप यह साबित नहीं करता कि संबंधित सभी मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए।
मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाने के दावे पर क्या सामने आया?
इस विवाद में सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया गया कि 85 हजार से ज्यादा फॉर्म मुख्य रूप से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित थे। CEO कार्यालय ने इस व्यापक दावे को फेक न्यूज बताया।
दूसरी ओर, The Reporters’ Collective की मूल जांच में तरबगंज और पीलीभीत विधानसभा क्षेत्रों में कुछ समूहों द्वारा दाखिल आपत्तियों में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी होने की बात कही गई थी। लेकिन यह निष्कर्ष अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज कुछ अनुरोधों के विश्लेषण पर आधारित था। इससे यह साबित नहीं होता कि सभी 85,854 फॉर्म मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ थे।
SIR और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य सूची में मौजूद गलत प्रविष्टियों की पहचान करना और पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को सही रखना है। इसलिए नाम हटाने की प्रक्रिया में उचित कारण, नोटिस, सुनवाई और नियमों का पालन मतदाताओं के अधिकारों के लिहाज से अहम है।
इस मामले में एक ओर चुनाव प्रशासन ने वायरल दावों को भ्रामक बताया है, तो दूसरी ओर खोजी रिपोर्ट ने Form-7 के रिकॉर्ड में कारण दर्ज नहीं होने और सॉफ्टवेयर की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इन सवालों का स्पष्ट जवाब देने के लिए संबंधित रिकॉर्ड, नियमों और आधिकारिक प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होगी।