नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: दिल्ली में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को कई महिला और छात्र संगठनों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई में महिलाओं, ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न, शारीरिक हिंसा और दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास एकत्र हुए और पोस्टर-बैनर लेकर पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़े। संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की कोशिश की और कथित घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करने की अपील की।
किन आरोपों को लेकर हुआ प्रदर्शन?
महिला संगठनों ने अपने बयान में दावा किया कि 20 जुलाई से विभिन्न विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कथित उत्पीड़न और शारीरिक हिंसा की घटनाएं सामने आईं, जबकि 2 अक्टूबर के बाद ऐसे आरोपों की चर्चा और तेज हुई। संगठनों ने कहा कि वीडियो, तस्वीरें और संबंधित लोगों के बयान इन आरोपों की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
एक महिला पत्रकार ने भी आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) स्तर के एक अधिकारी ने उनके साथ अनुचित शारीरिक व्यवहार किया। यह आरोप अपने आप में किसी अपराध का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसकी पुष्टि निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
महिला संगठनों की क्या मांग है?
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने मांग की कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ उचित कानूनी तथा विभागीय कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं और लैंगिक विविधता वाले लोगों को बिना डर के सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेन्स एसोसिएशन (AIDWA), नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (NFIW), ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेन्स एसोसिएशन (AIPWA) और अन्य महिला एवं छात्र संगठन शामिल थे।
पुलिस जांच और जवाबदेही का सवाल
इस मामले में आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। इससे पहले, 3 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों द्वारा पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें किए जाने की खबर आई थी। 4 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने संबंधित शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित करने की बात कही थी।
17 अक्टूबर के मार्च के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टें मुख्य रूप से प्रदर्शनकारी संगठनों की मांगों और उनके आरोपों पर केंद्रित हैं। इस रिपोर्ट के प्रकाशन के समय तक सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या जांच के अंतिम निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है। दिल्ली पुलिस का विस्तृत आधिकारिक जवाब और आगे की जांच के नतीजे सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
यह घटनाक्रम पुलिस कार्रवाई, नागरिकों के अधिकारों और विरोध-प्रदर्शनों के दौरान जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।