हरियाणा सरकार का बड़ा कदम! 2014 नीति के तहत नियमित कर्मचारियों का डेटा तलब

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चंडीगढ़, 17 अक्टूबर 2026 । हरियाणा में वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों के तहत सरकारी सेवा में स्थायी किए गए कर्मचारियों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के कार्यालय ने सभी संबंधित विभागों, कार्यालयों, बोर्डों, निगमों और संगठनों से ऐसे कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। 16 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार, विभागों को निर्धारित समयसीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इस प्रक्रिया का संबंध नियमितीकरण नीतियों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके अनुपालन से है।

 जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, मुख्य रूप से 16 जून, 18 जून और 7 जुलाई, 2014 को जारी की गई नियमितीकरण नीतियों, समय-समय पर इनमें किए गए संशोधनों, तथा अन्य समान नीतियों के अंतर्गत नियमित हुए ग्रुप-बी, सी और डी (Group B, C & D) के कर्मचारियों की संख्या और विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने होंगे। सभी संबंधित प्रशासनिक विभागों और विभागाध्यक्षों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे तय किए गए प्रारूप में पूरी जानकारी पत्र जारी होने की तिथि से 15 दिन के भीतर ई-मेल के माध्यम से संबंधित कार्यालय को भेजें। इससे मानव संसाधन विभाग  द्वारा आंकड़ों का संकलन  समय पर पूरा किया जा सके।

किन कर्मचारियों का डेटा मांगा गया है?

सरकार ने मुख्य रूप से उन कर्मचारियों का विवरण मांगा है, जिन्हें 16 जून 2014, 18 जून 2014 और 7 जुलाई 2014 की नियमितीकरण नीतियों या उनसे मिलती-जुलती अन्य नीतियों के तहत नियमित किया गया था। इसमें ग्रुप B, C और D के कर्मचारी शामिल हैं।

विभागों से कर्मचारियों के नाम, पद, नियमितीकरण की तारीख, संबंधित नीति और अन्य जरूरी सेवा विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अलग-अलग विभागों में इन नीतियों के तहत कितने कर्मचारी नियमित किए गए और संबंधित आदेशों का पालन किस तरह हुआ।

15 दिन में देनी होगी जानकारी

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को कर्मचारियों का ब्योरा जुटाकर 15 दिनों के भीतर भेजने के निर्देश दिए हैं। इससे सरकार को अलग-अलग विभागों में उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान करने और अदालत में आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी।

यह केवल कर्मचारियों की सामान्य सूची तैयार करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि वर्ष 2014 की नीतियों के तहत हुए नियमितीकरण की स्थिति का व्यवस्थित रिकॉर्ड जुटाने की कवायद है। विभागों को उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सही और अद्यतन जानकारी देनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्यों बढ़ी प्रक्रिया?

इस पूरे मामले की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का 16 अप्रैल 2026 का फैसला है। अदालत ने 16 जून और 18 जून 2014 की नीतियों के तहत नियमितीकरण को कुछ निर्धारित पात्रता शर्तों के अधीन वैध माना। इनमें 28 मई 2014 तक सेवा में होना और कम से कम तीन साल की सेवा पूरी करना शामिल था।

हालांकि, 7 जुलाई 2014 की नियमितीकरण नीति को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक ठहराया। अदालत ने इस नीति का लाभ लेकर पहले से सेवा में बने कर्मचारियों को सेवा में जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन उन्हें संबंधित पद के न्यूनतम वेतनमान पर रखने का निर्देश दिया। इसलिए अलग-अलग नीतियों के तहत नियमित हुए कर्मचारियों का सही रिकॉर्ड जुटाना सरकार के लिए जरूरी है।

 

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