जींद, 17 अक्टूबर 2026 । हरियाणा के जींद जिले के तलोडा गांव में जमीन को लेकर हुआ पारिवारिक विवाद एक हत्या में बदल गया। आरोप है कि चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व सब-इंस्पेक्टर मदन लाल ने अपने इकलौते बेटे मुरारी लाल को पुलिस की मौजूदगी में लाइसेंसी पिस्तौल से पांच गोलियां मार दीं। वारदात के बाद आरोपी चंडीगढ़ भाग गया था। मामले में पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है, जो हत्या के साथ-साथ मौके पर पहुंची डायल 112 टीम की भूमिका और कथित लापरवाही की भी जांच करेगा।
आरोपी मदनलाल बुधवार को चंडीगढ़ से भतीजे की शादी में शामिल होने अपने गांव तलोड़ा आया था। इस दौरान जमीन को लेकर पिता-पुत्र के बीच कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ता देख ग्रामीणों ने मदनलाल को पड़ोस के भर के एक कमरे में रोक लिया। मुरारी अपने घर पर ही थे। इसके बाद मुरारी ने डायल 112 पर फोन करके पुलिस बुला ली थी। पिता को पुलिस के स्तमनने लाने के लिए मुरारी ने जैसे ही उनके कमरे का दरवाजा खोला उन्होंने पुलिस के सामने ही लाइसेंसी पिस्तौल से पांच गोलियां मारकर हत्या कर दी। बहू शिवानी की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी मदन लाल समेत छह लोगों को नामजद करते हुए उनके खिलाफ हत्या को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जमीन के विवाद में पिता-पुत्र के बीच हुआ झगड़ा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 की रात मदन लाल अपने गांव तलोडा आया था। वह चंडीगढ़ में रहता था और परिवार में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचा था। इसी दौरान पैतृक जमीन को लेकर उसका बेटे मुरारी लाल के साथ विवाद हो गया। कहासुनी बढ़ने पर ग्रामीणों ने मदन लाल को पड़ोस के घर के एक कमरे में रोक दिया।
विवाद को लेकर मुरारी लाल ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को बुलाया। आरोप है कि जब मुरारी अपने पिता को पुलिस के सामने लाने के लिए कमरे का दरवाजा खोलने लगा, तभी मदन लाल ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से उस पर गोलियां चला दीं। मुरारी की मौके पर ही मौत हो गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, पोस्टमार्टम के दौरान मुरारी लाल के शरीर से पांच गोलियां निकाली गईं। पुलिस ने घटनास्थल से कारतूस के खोल भी बरामद किए। वारदात के समय डायल 112 की गाड़ी में मौजूद पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं।
मृतक की पत्नी शिवानी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि गोली चलने के बाद मौके पर मौजूद दोनों पुलिसकर्मी वहां से चले गए। इसके बाद उन्होंने दोबारा डायल 112 पर फोन किया। इन आरोपों की जांच की जा रही है और पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय होना जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
हत्या के बाद चंडीगढ़ भागा आरोपी, फिर किया सरेंडर
घटना के बाद मदन लाल कथित तौर पर चंडीगढ़ भाग गया था। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उसने अगले दिन जींद की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की और अदालत से रिमांड भी हासिल किया।
जांच के दौरान पुलिस आरोपी को गांव लेकर गई ताकि वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल और अन्य साक्ष्य बरामद किए जा सकें। 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस उस समय तक पिस्तौल बरामद नहीं कर पाई थी। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि आरोपी ने हथियार गांव के तालाब में फेंकने की बात बताई थी।
बहू ने परिवार के अन्य सदस्यों पर भी लगाए आरोप
मृतक की पत्नी शिवानी ने शिकायत में परिवार के कुछ अन्य सदस्यों और लोगों पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर हत्या, आपराधिक साजिश और शस्त्र कानून से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
इन आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी संलिप्तता साबित हो गई है। जांच एजेंसी को आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी होगी।
इस मामले में अब तीन अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं—हत्या के पीछे जमीन विवाद की पूरी वजह क्या थी, वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल कहां है और घटना के दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों ने क्या कार्रवाई की। SIT की जांच इन पहलुओं पर रोशनी डाल सकती है।
तलोडा की इस घटना ने पुलिस की आपातकालीन प्रतिक्रिया और पारिवारिक विवादों से जुड़ी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई के महत्व को भी सामने रखा है। जांच के निष्कर्षों और अदालत की कार्यवाही से ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।