प्रोटेस्ट मार्च पर भड़के नंदकिशोर गुर्जर, राहुल गांधी को लेकर दिया विवादित बयान!
गाजियाबाद, 17 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश में लोनी से बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए विरोध मार्च को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ जेल भेजने और यहां तक कि फांसी की सजा देने की मांग की। गुर्जर ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शन करके न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती दी गई है। उनके इस बयान से बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।
सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन के मुद्दे पर नंदकिशोर गुर्जर ने राहुल गांधी को फांसी की सजा देने की मांग की है। साथ ही मुकदमा दर्ज कर सपा और कांग्रेस की मान्यता खत्म करने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को जेल में डाल देना चाहिए। गाजियाबाद में मीडिया से बातचीत में विधायक गुर्जर ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर हुए प्रदर्शन को गंभीर मामला बताया। उन्होंने चीफ जस्टिस से इस मामले को संज्ञान लेते हुए कारवाई करने की मांग की है। इस तरह की गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।
सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन पर जताई नाराजगी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नंदकिशोर गुर्जर ने गाजियाबाद क्षेत्र में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी और विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर जैसे निर्धारित स्थान पर विरोध प्रदर्शन करना अलग बात है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शन करने का अधिकार किसने दिया?
बीजेपी विधायक ने इस घटनाक्रम को न्यायपालिका के प्रति असम्मान से जोड़ते हुए संबंधित नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी मामले का संज्ञान लेने की अपील की। हालांकि, उनकी ओर से की गई सजा संबंधी मांग राजनीतिक बयान है; किसी व्यक्ति को दंड देने का निर्णय कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होता है।
राहुल गांधी पर क्यों भड़के नंदकिशोर गुर्जर?
राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विरोध मार्च का आह्वान किया था। कांग्रेस और अन्य विपक्षी समूह मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
राहुल गांधी का कहना है कि इस मुद्दे पर विपक्षी दलों, नागरिक समाज और आम लोगों को आवाज उठानी चाहिए। दूसरी ओर, नंदकिशोर गुर्जर ने इस तरह के विरोध प्रदर्शन की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक तथा संवैधानिक व्यवस्था के लिए अनुचित बताया। इस विवाद में विपक्ष के आरोपों और बीजेपी विधायक की प्रतिक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।
अखिलेश यादव और सपा पर भी साधा निशाना
रिपोर्टों के मुताबिक, नंदकिशोर गुर्जर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए उनकी पार्टियों की मान्यता समाप्त करने जैसी टिप्पणी भी की।
इन बयानों के बाद विवाद केवल विरोध मार्च तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्षी दलों की भूमिका और राजनीतिक विरोध की सीमाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, किसी राजनीतिक दल की मान्यता समाप्त करने या किसी नेता को दंडित करने का फैसला संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम संस्थाओं की प्रक्रिया के अनुसार ही हो सकता है।
SIR और वोटर लिस्ट का मुद्दा बना राजनीतिक टकराव की वजह
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) इन दिनों राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है। वहीं, चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की जांच और सुधार को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका भी चर्चा में है।
राहुल गांधी और विपक्षी दल इस मुद्दे पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि बीजेपी के कुछ नेता विरोध प्रदर्शन के तरीके और उसके औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं। इस पूरे विवाद में मतदाता सूची से जुड़े आरोपों का मूल्यांकन उपलब्ध तथ्यों, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर किया जाना चाहिए।
नंदकिशोर गुर्जर की टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। किसी नेता के खिलाफ जेल या फांसी जैसी सजा की मांग करना एक राजनीतिक बयान हो सकता है, लेकिन ऐसी सजा केवल कानून के तहत स्थापित प्रक्रिया और सक्षम अदालत के निर्णय से ही दी जा सकती है।
फिलहाल, इस मामले में गुर्जर की टिप्पणी और राहुल गांधी के विरोध मार्च को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। आगे इस मुद्दे पर कांग्रेस, बीजेपी और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।