नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026 । दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को 16 अक्टूबर 2026 की शाम हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें 17 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाना है। यह कार्रवाई दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच की गई। पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की है।
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें आज दोपहर 12 बजे स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जाएगा।
दीपके को शुक्रवार को कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले हिरासत में लिया गया था। 8 दिन में दीपके के खिलाफ यह दूसरी बार कार्रवाई है। इससे पहले 10 अक्टूबर को उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिया गया था। अगले दिन वे रिहा हो गए थे।
इसी मामले में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 लोगों को शुक्रवार को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह करीब 5 बजे बोरा को रिहा कर दिया। पुलिस के मुताबिक, उन्हें दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत हिरासत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद छोड़ा गया।
BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई
अभिजीत दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई है। ये प्रावधान संभावित शांति भंग या संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने से जुड़े हैं।
आज SEM कोर्ट में पेशी के दौरान उनकी हिरासत और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल, मामले में अदालत की कार्यवाही और उसके आदेश का इंतजार है। गिरफ्तारी अपने आप में किसी अपराध में दोष सिद्ध होने के समान नहीं है।
नेहा बोरा को रिहा किया गया
इसी मामले में अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शुक्रवार शाम हिरासत में लिया गया था। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार तड़के आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने पुलिस की कार्रवाई और हिरासत की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान वकीलों से संपर्क करने में कठिनाई हुई। ये आरोप उनके बयान पर आधारित हैं; इस संबंध में पुलिस का पक्ष और संबंधित कानूनी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की क्या है वजह?
CJP और कुछ छात्र तथा विपक्षी समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और उसमें नाम हटाए जाने को लेकर उठे सवाल हैं। प्रदर्शनकारी आरोप लगाते हैं कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग का पक्ष है कि सूची में सुधार की प्रक्रिया के तहत गलत, दोहराए गए या अयोग्य नामों की पहचान की जाती है और पात्र मतदाता दोबारा नाम जुड़वाने की प्रक्रिया अपना सकते हैं।
अभिजीत दीपके की आज विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेशी इस मामले का अगला अहम चरण है। अदालत में होने वाली कार्यवाही से उनकी हिरासत और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले अदालत के आदेश और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों का इंतजार करना जरूरी है।