लखनऊ में डॉक्टरों का सरकार के खिलाफ विरोध
50-55 हजार वेतन पाने वाले चिकित्सकों ने उठाया भेदभाव का मुद्दा
लखनऊ, 16 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बॉन्ड के तहत सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में तैनात एमबीबीएस डॉक्टर समान वेतन और बकाया एरियर की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समाज उन्हें भगवान का दर्जा देता है, लेकिन उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मान तथा वेतन नहीं मिल रहा है। 16 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने वेतन में असमानता और सरकार की ओर से किए गए वादे पूरे नहीं होने पर नाराजगी जताई है।
डॉक्टरों का आरोप है कि समान एमबीबीएस डिग्री, समान बॉन्ड अवधि और समान भर्ती प्रक्रिया होने के बावजूद अलग-अलग सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात चिकित्सकों के वेतन में बड़ा अंतर है। उनकी प्रमुख मांग है कि समान काम करने वाले डॉक्टरों को समान वेतन दिया जाए और लंबे समय से लंबित एरियर का भुगतान किया जाए।
जब डॉक्टरों ने 1090 चौराहे से मानव श्रृंखला बनाकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया तो भारी पुलिस बल ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक लिया। इस दौरान जब आक्रोशित डॉक्टर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए तो स्थिति को संभालने के लिए हजरतगंज के एसीपी खुद जमीन पर बैठ गए और हाथ जोड़कर डॉक्टरों से शांति बनाए रखने व रास्ता खाली करने की अपील की।
50-55 हजार बनाम 1.10 लाख रुपये, वेतन में अंतर पर सवाल
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में तैनात बॉन्डेड डॉक्टरों को लगभग 50 हजार से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। वहीं, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड के तहत काम करने वाले कुछ डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये या उससे अधिक वेतन दिया जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि जब उनकी शैक्षणिक योग्यता और सेवा से जुड़ी शर्तें समान हैं, तो वेतन में इतना बड़ा अंतर क्यों है? उनका मानना है कि इस विसंगति को दूर करने के लिए सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आश्वासन का इंतजार
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के पहले दिए गए आश्वासन का भी जिक्र किया है। डॉक्टरों के मुताबिक, 2 सितंबर को उन्हें वेतन संबंधी शासनादेश जल्द जारी किए जाने का भरोसा मिला था। हालांकि, उनका दावा है कि अब तक अपेक्षित आदेश जारी नहीं हुआ है।
डॉक्टरों का कहना है कि कई बार अपनी मांगें अधिकारियों तक पहुंचाने के बावजूद ठोस निर्णय नहीं हुआ। इसी वजह से उनका असंतोष बढ़ा है और वे आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस से भी हुआ टकराव
लखनऊ में समान वेतन की मांग को लेकर डॉक्टरों ने हजरतगंज स्थित जीपीओ और आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ डॉक्टरों को वहां से हटाकर बसों के जरिए ईको गार्डन और अन्य स्थानों पर पहुंचाया। इस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने नाराजगी जताई और पुलिस पर जबरन हटाने का आरोप लगाया।
डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहते हैं। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पुलिस और चिकित्सकों के बीच हुई खींचतान ने मामले को और चर्चा में ला दिया।
बॉन्ड के तहत नियुक्त डॉक्टर उत्तर प्रदेश के विभिन्न सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं देते हैं। इन संस्थानों में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार या लंबे आंदोलन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की मांग है कि सरकार वेतन विसंगति दूर करने के साथ बकाया एरियर के भुगतान पर भी जल्द फैसला ले। दूसरी ओर, इस विवाद का समाधान निकालने के लिए शासन स्तर पर स्पष्ट निर्णय और आधिकारिक आदेश महत्वपूर्ण होंगे।
अब सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
लखनऊ में बॉन्डेड डॉक्टरों का आंदोलन समान वेतन, एरियर और सेवा शर्तों से जुड़े सवालों को सामने ला रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है।
अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार डॉक्टरों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और वेतन संबंधी शासनादेश कब तक जारी होता है। इस फैसले का असर न केवल प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों पर, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।