हिट एंड रन पीड़ितों के मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट का रुख सख्त

0

चंडीगढ़ , 12 अक्टूबर 2026 । हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों और मृतकों के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से ऐसे मामलों में मुआवजा वितरण से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है। इस कदम का उद्देश्य यह जानना है कि सड़क हादसों में अज्ञात वाहन के फरार हो जाने के बाद प्रभावित परिवारों को निर्धारित आर्थिक सहायता किस तरह और कितनी प्रभावी तरीके से मिल रही है।

हाई कोर्ट ने तीनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वर्ष 2022 की मुआवजा योजना लागू होने के बाद 30 सितंबर 2026 तक दर्ज हिट एंड रन मामलों का पूरा ब्योरा अदालत में पेश किया जाए। इसमें कुल दर्ज मामलों के साथ-साथ निपटाए गए दावों, लंबित मामलों और जिन मामलों में मुआवजा स्वीकृत हुआ है, उनमें राशि के भुगतान की स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

क्या होते हैं हिट एंड रन मामले?

हिट एंड रन उन सड़क दुर्घटनाओं को कहा जाता है, जिनमें वाहन चालक हादसे के बाद घटनास्थल से फरार हो जाता है और वाहन की पहचान नहीं हो पाती। ऐसे मामलों में पीड़ित या मृतक के परिजन आर्थिक और कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

मोटर वाहन अधिनियम के तहत हिट एंड रन दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए मुआवजे की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य हादसे में घायल व्यक्ति या मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

अदालत द्वारा पूरा ब्योरा मांगे जाने के बाद दोनों राज्यों को संबंधित मुआवजा मामलों की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। ऐसे विवरणों में लंबित आवेदनों, स्वीकृत दावों, वितरित मुआवजे और सहायता पाने में आने वाली बाधाओं की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, अदालत के सटीक निर्देशों और मांगी गई जानकारी के बिंदुओं की पुष्टि आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए।

मुआवजा मिलने में देरी क्यों बनती है चिंता?

हिट एंड रन मामलों में वाहन की पहचान न होना, जरूरी दस्तावेज जुटाना और आवेदन प्रक्रिया पूरी करना पीड़ित परिवारों के लिए मुश्किल हो सकता है। समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिलने से घायल व्यक्ति के इलाज और मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

ऐसे में प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना, आवेदनों की समय पर जांच करना और पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाना जरूरी है।

पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना क्यों अहम?

हिट एंड रन मामलों में निर्धारित मुआवजा पीड़ितों और उनके परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस व्यवस्था की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि पात्र लोगों को जानकारी, आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी न हो।

हाई कोर्ट की ओर से ब्योरा मांगे जाने से दोनों राज्यों में मुआवजा व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों और सरकारों की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हिट एंड रन मुआवजा मामलों में पंजाब और हरियाणा से विस्तृत जानकारी मांगी है। इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम दोनों राज्यों की ओर से ब्योरा प्रस्तुत करना और अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करना होगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.