नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026 । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर अपने अलग अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने बच्चों की लोकप्रिय अंग्रेजी कविता ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ की तर्ज पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। ममता बनर्जी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी इसे साझा करते हुए ममता की तारीफ की।
कविता के हल्के-फुल्के अंदाज के जरिए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर अपना विरोध जाहिर किया। हालांकि, वीडियो में उठाए गए आरोप विपक्ष के राजनीतिक रुख को दर्शाते हैं। चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया को पात्र मतदाताओं की पहचान और मतदाता सूची को दुरुस्त करने की कवायद बताया गया है।
जब ममता ने गाया ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’
इस वीडियो में ममता बनर्जी अलग ही अंदाज में दिख रही हैं। वो ‘जॉनी-जॉनी यस पापा, ज्ञानेश कुमार नो पापा’ गाती दिख रही हैं। इस दौरान उनके चेहरे पर मुस्कान भी है। ममता बनर्जी का ‘जॉनी-जॉनी यस पापा…’ गाते हुए वीडियो एनसीपी (शरद पवार) पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने शेयर किया है।
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने ममता बनर्जी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने ममता की तारीफ करते हुए कहा कि उनके संदेश में हास्य के साथ एक गंभीर बात भी है। सुप्रिया सुले ने लोकतंत्र और भारत को बचाने का संदेश भी लिखा।
विपक्षी नेताओं की ओर से इस वीडियो को साझा किए जाने से SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और चर्चा मिली है।
SIR प्रक्रिया को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना और उसमें पात्र तथा अपात्र मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों को दुरुस्त करना है।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दस्तावेजों और सत्यापन की प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हटने का खतरा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है।
इसी मुद्दे पर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी आवाज उठा रहा है। ममता बनर्जी का वीडियो इसी व्यापक राजनीतिक विरोध की कड़ी के रूप में सामने आया है।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के बीच ममता बनर्जी चर्चा में
10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक हलचल रही। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश के दौरान पुलिस की हिरासत में ली गईं। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के सांसद भी थे।
इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष तथा सरकार के बीच चल रहे टकराव को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
कविता के जरिए सियासी संदेश देने की कोशिश
ममता बनर्जी का ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ वाला अंदाज दिखाता है कि राजनीतिक विरोध के लिए नेता अब पारंपरिक भाषणों के साथ रचनात्मक और सोशल मीडिया के अनुकूल तरीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटी कविता और व्यंग्य के माध्यम से जटिल राजनीतिक मुद्दे को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।
हालांकि, वीडियो की लोकप्रियता से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जनता की राय या चुनावी समीकरणों में कोई निश्चित बदलाव आ गया है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि SIR, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका विपक्षी राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।