‘परशुराम की प्रतीक्षा’ लेकर सपा नेता से मिले पूर्व BJP विधायक देवमणि द्विवेदी,

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सुल्तानपुर, 09 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसी बीच सुल्तानपुर की लंभुआ विधानसभा सीट से पूर्व भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी की समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से लखनऊ में हुई मुलाकात चर्चा का विषय बन गई है। इस मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मुलाकात के दौरान देवमणि द्विवेदी ने माता प्रसाद पांडेय को अपनी पुस्तक ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ भेंट की। द्विवेदी ने इस मुलाकात को लेकर उनके प्रति अपने स्नेह और सम्मान का भी उल्लेख किया। हालांकि, इस मुलाकात के आधार पर उनके भाजपा छोड़ने या सपा में शामिल होने का निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं होगा।

माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात के क्या हैं मायने?

देवमणि द्विवेदी और माता प्रसाद पांडेय की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। दोनों नेताओं की तस्वीर सामने आने के बाद लंभुआ और सुल्तानपुर की राजनीति में इस घटनाक्रम पर चर्चा शुरू हो गई है।

मुलाकात का एक प्रमुख पहलू पुस्तक ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ का भेंट किया जाना है। माता प्रसाद पांडेय सपा के वरिष्ठ ब्राह्मण नेता हैं और प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वहीं, देवमणि द्विवेदी लंभुआ से विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में अपना राजनीतिक संपर्क बनाए हुए हैं।

फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी में मुलाकात को लेकर किसी नए राजनीतिक गठबंधन या पार्टी परिवर्तन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा।

देवमणि द्विवेदी ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर लंभुआ सीट से जीत दर्ज की थी। उन्होंने उस चुनाव में 78,627 वोट हासिल किए और बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी तथा पूर्व मंत्री विनोद सिंह को 12,903 मतों से हराया था।

विधायक बनने से पहले द्विवेदी रेलवे भूमि प्राधिकरण में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद राजनीति में कदम रखा था।

हालांकि, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट नहीं दिया। पार्टी ने उनकी जगह सीताराम वर्मा को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने चुनाव में जीत हासिल की। इसके बाद भी देवमणि द्विवेदी की क्षेत्रीय राजनीति में सक्रियता चर्चा में बनी रही।

टिकट कटने के बाद भी लंभुआ से जुड़ाव

वर्ष 2022 में टिकट नहीं मिलने के बाद देवमणि द्विवेदी के राजनीतिक भविष्य को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। लंभुआ विधानसभा क्षेत्र में उनकी सक्रियता और स्थानीय संपर्कों को देखते हुए उनके अगले राजनीतिक कदम पर नजर रखी जाती है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में टिकट के संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में पूर्व विधायक की दूसरी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।

फिर भी, टिकट को लेकर असंतोष या पार्टी छोड़ने की मंशा को केवल एक मुलाकात से जोड़ना सही नहीं होगा। देवमणि द्विवेदी ने भविष्य की अपनी राजनीतिक रणनीति को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा की है या नहीं, यह अलग से पुष्ट किया जाना जरूरी है।

सुल्तानपुर जिले की लंभुआ विधानसभा सीट पर अगले चुनाव को लेकर भाजपा, सपा और अन्य राजनीतिक दलों के संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हो रही है। मौजूदा विधायक सीताराम वर्मा के अलावा पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में आता रहा है।

समाजवादी पार्टी की ओर से भी इस सीट पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में स्थानीय नेताओं की मुलाकातें और संगठनात्मक सक्रियता राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

हालांकि, किसी भी पार्टी की ओर से आधिकारिक उम्मीदवार घोषित होने तक इन चर्चाओं को संभावनाओं के तौर पर ही देखना चाहिए।

ब्राह्मण राजनीति और ‘परशुराम’ का संदर्भ

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व लंबे समय से विभिन्न दलों की रणनीति का हिस्सा रहा है। सपा, भाजपा और बसपा समेत कई दल अलग-अलग समय पर ब्राह्मण नेताओं को आगे लाने और समुदाय से संवाद बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं।

माता प्रसाद पांडेय सपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल हैं। वहीं, देवमणि द्विवेदी भी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। ऐसे में दोनों की मुलाकात को कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक सामाजिक प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावी रणनीति के व्यापक संदर्भ में देख सकते हैं।

लेकिन पुस्तक भेंट करने या व्यक्तिगत मुलाकात से किसी खास जातीय समीकरण, चुनावी गठबंधन अथवा पार्टी परिवर्तन की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए संबंधित नेताओं के आधिकारिक बयान और आगे की राजनीतिक गतिविधियां महत्वपूर्ण होंगी।

क्या भाजपा छोड़कर सपा में जा सकते हैं देवमणि द्विवेदी?

इस मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या देवमणि द्विवेदी 2027 के चुनाव से पहले कोई नया राजनीतिक रास्ता चुन सकते हैं। फिलहाल इस सवाल का स्पष्ट जवाब उपलब्ध नहीं है।

उनका पिछला चुनावी रिकॉर्ड, 2022 में टिकट नहीं मिलना और अब सपा के वरिष्ठ नेता से मुलाकात राजनीतिक चर्चा को जरूर बढ़ाते हैं। लेकिन इन घटनाओं को जोड़कर पार्टी बदलने का निष्कर्ष निकालना अटकल ही होगा।

आने वाले समय में देवमणि द्विवेदी की भाजपा नेतृत्व के साथ गतिविधियां, लंभुआ में उनकी राजनीतिक भूमिका और किसी पार्टी की ओर से आने वाला आधिकारिक बयान इस मामले की दिशा स्पष्ट कर सकता है।

फिलहाल ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ पुस्तक भेंट करने और माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात ने लंभुआ की राजनीति में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। लेकिन देवमणि द्विवेदी का अगला कदम क्या होगा, यह उनकी ओर से स्पष्ट घोषणा होने के बाद ही तय माना जा सकेगा।

 

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