लाइक और फॉलोअर्स के लिए AI से SSB कैंप में धमाके का फर्जी वीडियो बनाया, युवक गिरफ्तार
महराजगंज, 09 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित सशस्त्र सीमा बल (SSB) कैंप में धमाका होने का फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल एडिटिंग की मदद से तैयार किया गया था। इसमें ऐसा दिखाया गया कि मानो सुरक्षा बल के कैंप पर बम से हमला हुआ हो।
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं और डिजिटल सर्विलांस के जरिए संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो का वास्तविक घटना से संबंध नहीं था।
फैयाज अहमद ने यह AI जनरेटेड वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। जैसे ही पुलिस को इसकी सूचना मिली उसने डिजिटल सर्विलांस के जरिए वीडियो बनाने वाले आरोपी फैयाज अहमद को तलाशा और उसे गिरफ्तार कर लिया।
महराजगंज के सेवतरी गांव का रहने वाला है आरोपी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान फैयाज अहमद के रूप में हुई है। वह महराजगंज जिले के परसामलिक थाना क्षेत्र के सेवतरी गांव का निवासी है। रिपोर्टों के अनुसार, उसने भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित SSB की 22वीं वाहिनी के कैंप को निशाना बनाते हुए करीब नौ सेकंड का वीडियो तैयार किया था।
वीडियो में कैंप के पीछे विस्फोट और आग की लपटें दिखाई गई थीं। इसके साथ चुनौतीपूर्ण अंदाज में “अब करो कॉपी” जैसा कैप्शन भी लिखा गया था। इस तरह के दृश्य से लोगों को वास्तविक हमले का भ्रम हो सकता था।
सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सक्रिय हुई पुलिस
वीडियो की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और SSB अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान करने के लिए डिजिटल सर्विलांस का सहारा लिया। जांच के बाद आरोपी तक पहुंच बनाई गई और आपत्तिजनक पोस्ट हटवा दी गई।
महराजगंज के अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के मुताबिक, वीडियो पोस्ट करने वाले अकाउंट की पहचान होने के बाद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर न्यायालय के समक्ष पेश किया, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने सोशल मीडिया पर लाइक, व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए वीडियो बनाया और पोस्ट किया था। हालांकि, इस मामले में आरोपी के बयान और जांच से जुड़े निष्कर्षों को पुलिस के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए किसी संवेदनशील सुरक्षा प्रतिष्ठान पर हमले का झूठा दृश्य दिखाना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। इससे आम लोगों में डर फैलने के साथ सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज को लेकर गलत सूचना भी प्रसारित हो सकती है।
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा प्रतिष्ठान को लेकर सतर्कता
SSB भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में सीमा पर स्थित कैंप को धमाके में उड़ाए जाने का फर्जी वीडियो सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया। अधिकारियों ने संवेदनशील प्रतिष्ठानों से संबंधित भ्रामक सामग्री पर निगरानी बढ़ाने की बात कही है।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि AI तकनीक से तैयार किए गए नकली वीडियो वास्तविक घटनाओं जैसे लग सकते हैं। यदि ऐसे वीडियो बिना जांच के साझा किए जाएं, तो गलत सूचना तेजी से फैल सकती है।
AI से बने फर्जी वीडियो पोस्ट करने पर क्या रखें ध्यान?
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को किसी भी सनसनीखेज वीडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए। विशेष रूप से सेना, पुलिस, अर्धसैनिक बलों, सीमावर्ती इलाकों या अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों से जुड़े वीडियो को आधिकारिक पुष्टि के बिना वास्तविक घटना मानना उचित नहीं है।
AI से तैयार सामग्री को वास्तविक घटना के रूप में पेश करना भ्रम और भय पैदा कर सकता है। इसलिए कंटेंट बनाने वालों को भी तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना चाहिए। किसी वीडियो की सत्यता पर संदेह होने पर उसे आगे साझा करने के बजाय संबंधित आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।