तिलक राज बेहड़ का बढ़ा राजनीतिक कद; चुनाव से पहले खूब रोए थे

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देहरादून, 08 अक्टूबर 2026 । उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में हुए नगरीय चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता की तस्वीर पेश की है। किच्छा और सिरौलीकलां नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया। इस जीत का सबसे बड़ा राजनीतिक असर किच्छा के कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ की स्थिति पर दिखाई दे रहा है। चुनाव से पहले जिस मुकाबले को बेहड़ और भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा था, उसमें कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत ने बेहड़ के खेमे को मजबूत संदेश दिया है।

किच्छा नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने भाजपा के संदीप अरोड़ा को 6,147 वोट के बड़े अंतर से हराया। इस जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया और विधायक तिलक राज बेहड़ के समर्थकों ने जश्न मनाया।

राजेश प्रताप सिंह ने अपनी जीत का श्रेय जनता और विधायक तिलक राज बेहड़ को दिया। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें अपना समर्थन देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र के लोग उनके साथ हैं।

सिरौलीकलां में भी कांग्रेस का दबदबा

कांग्रेस ने सिर्फ किच्छा में ही जीत नहीं दर्ज की, बल्कि सिरौलीकलां में भी पार्टी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया। कांग्रेस प्रत्याशी राशिदा बेगम ने निर्दलीय प्रत्याशी फरीन जहां को 1,773 वोट के अंतर से हराया।

सिरौलीकलां नगरपालिका के वार्डों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहा। उपलब्ध नतीजों के मुताबिक, यहां कांग्रेस ने सभी वार्डों में जीत दर्ज कर पूरे बोर्ड पर कब्जा कर लिया। किच्छा के 20 वार्डों में कांग्रेस ने 10 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 6 और निर्दलीयों को 4 वार्ड मिले।

इन चुनावों की चर्चा सिर्फ नतीजों की वजह से नहीं हुई। मतदान के दौरान किच्छा में स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ और भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला आमने-सामने आ गए थे।

विवाद के दौरान दोनों पक्षों की ओर से आरोप लगाए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, बेहड़ ने अपने साथ मारपीट और थप्पड़ मारे जाने का आरोप लगाया था, जबकि भाजपा खेमे की ओर से भी कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाए गए। इस घटनाक्रम के दौरान दोनों नेताओं के भावुक होने और रोने के दृश्य भी सामने आए थे।

अब 2027 से पहले बढ़ी राजनीतिक चर्चा

किच्छा और सिरौलीकलां के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। इसलिए स्थानीय निकाय चुनाव के परिणामों को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, नगर निकाय चुनाव के परिणामों को सीधे विधानसभा चुनाव का पैमाना मानना उचित नहीं होगा। फिर भी किच्छा में कांग्रेस की लगातार मजबूत मौजूदगी और भाजपा के साथ सीधे मुकाबले में जीत ने स्थानीय स्तर पर तिलक राज बेहड़ की भूमिका को चर्चा में ला दिया है।

बेहड़ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह जीत?

किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने कांग्रेस प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी। ऐसे में राजेश प्रताप सिंह की जीत का राजनीतिक श्रेय उनके खेमे को भी मिल रहा है।

खास बात यह है कि मुकाबले में भाजपा की ओर से पूर्व विधायक राजेश शुक्ला सक्रिय थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बेहड़ और शुक्ला आमने-सामने रह चुके हैं। अब निकाय चुनाव में बेहड़ समर्थित प्रत्याशी की जीत ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मुकाबले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

किच्छा और सिरौलीकलां में कांग्रेस की जीत पार्टी के लिए स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किच्छा में कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के साथ कई वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि सिरौलीकलां में पार्टी ने अध्यक्ष पद और पूरे बोर्ड पर कब्जा किया।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कांग्रेस इस स्थानीय चुनावी प्रदर्शन को संगठन विस्तार और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में किस तरह इस्तेमाल करती है।

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