नई दिल्ली, 08 अक्टूबर 2026 । बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान जारी है। इसी मुद्दे पर गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को महागठबंधन ने पटना में राजभवन मार्च निकाला। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी और वाम दलों के नेता-कार्यकर्ता मार्च में शामिल हुए। मार्च के दौरान पुलिस ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की।
तेजस्वी यादव को हिरासत में नहीं लिया गया- पटना पुलिस
इस बीच पुलिस की ओर से जानकारी दी गई है कि मार्च के दौरान पुलिस की ओर से सुरक्षा के लिए कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई थी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और उनके साथ मौजूद नेताओं-कार्यकर्ताओं ने दो बैरिकेडिंग पार कर ली। इसके बाद तीसरी बैरिकेडिंग पर पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। तेजस्वी यादव समेत डेलिगेशन के सदस्यों को पुलिस की गाड़ी में बैठाया गया। उन्हें हिरासत में लेने की बात से पुलिस ने इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक छह सदस्यीय डेलिगेशन को राजभवन जाने की अनुमति दी गई है और उन्हें उसी के तहत राजभवन ले जाया जा रहा है।
तेजस्वी, मुकेश सहनी समेत कई नेता राजभवन पहुंचे
मार्च में आरजेडी के अलावा विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, आरजेडी सांसद मीसा भारती और वाम दलों के नेता भी शामिल रहे।
पुलिस ने एक प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी। इसके बाद तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी और महागठबंधन के अन्य प्रतिनिधि राजभवन पहुंचे। वहां प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
महागठबंधन का यह प्रदर्शन बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में था। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठा रहा है।
महागठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। हालांकि, SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को राजनीतिक दलों के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
पटना में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राजभवन मार्च को देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। कुछ रिपोर्टों के अनुसार संवेदनशील इलाकों में पांच स्तर की बैरिकेडिंग भी की गई थी।
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच आगे बढ़ने को लेकर तनातनी की स्थिति बनी। पुलिस का कहना था कि प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी गई थी, जबकि बाकी प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान पर रोक दिया गया।
SIR के खिलाफ महागठबंधन ने चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम बनाया है। इससे पहले 7 अक्टूबर को बिहार के 534 प्रखंड मुख्यालयों पर आक्रोश मार्च और पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके बाद 8 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और पटना में राजभवन मार्च का कार्यक्रम रखा गया।
इस आंदोलन के जरिए विपक्ष मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को लगातार उठा रहा है।
राज्यपाल के सामने रखी गईं मांगें
राजभवन पहुंचने के बाद महागठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां राज्यपाल के सामने रखीं। नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से रखी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार में चुनावी राजनीति और SIR को लेकर विपक्ष का आंदोलन लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। राजभवन मार्च में तेजस्वी यादव का बैरिकेडिंग पार करना और उसके बाद प्रतिनिधिमंडल का राज्यपाल से मिलना दिनभर चर्चा का विषय बना रहा।