पंजाब में AAP के सामने चुनौती और मान की लोकप्रियता

क्या 2027 में फिर बनेगी सरकार?

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चंडीगढ़, 06 अक्टूबर 2026 । पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी है। आम आदमी पार्टी यानी AAP के सामने सबसे बड़ा सवाल सत्ता में दोबारा वापसी का है। भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल में मुफ्त बिजली और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं सहित कई कल्याणकारी कार्यक्रमों को चुनावी राजनीति के केंद्र में रखा है। वहीं, विपक्ष नशे, बेरोजगारी, पलायन और सरकार के कामकाज से जुड़े मुद्दों को लेकर AAP को घेर रहा है।

ऐसे माहौल में यह सवाल अहम है कि पंजाब के वोटरों की मौजूदा नब्ज किस तरफ इशारा कर रही है। उपलब्ध सर्वेक्षणों में AAP को बढ़त तो दिखाई गई है, लेकिन साथ ही सरकार और स्थानीय विधायकों को लेकर असंतोष भी सामने आया है। इसलिए अभी से चुनाव का अंतिम परिणाम तय मानना उचित नहीं होगा।

भगवंत मान सरकार की मुफ्त बिजली योजना

पंजाब में सरकार बनाने से पहले आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि प्रदेश में हर महीने 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। इसी के साथ बिजली के बिल माफ किए जाएंगे। पिछले लगभग साढ़े 4 सालों से सरकार इस योजना को लागू कर रही है। सरकार की इस स्कीम की तहत हर घर को प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ मिलता है। इस मुफ्त योजना से पंजाब के के करीब 90% परिवारों का बिजली बिल शून्य आता है। सरकार की इस योजना का सीधा असर घर के बजट पर पड़ रहा है।

अगस्त 2026 के India Today-CVoter Mood of the Nation सर्वे के मुताबिक पंजाब में 34 फीसदी लोगों ने AAP को अपनी पसंद बताया। कांग्रेस को 30.2 फीसदी समर्थन मिला। इसके बाद BJP को 12.2 फीसदी, शिरोमणि अकाली दल को 11.3 फीसदी और अकाली दल (वारिस पंजाब दे) को 6.6 फीसदी वोट पसंद मिला।

इस आंकड़े से AAP और कांग्रेस के बीच अंतर 4 फीसदी से थोड़ा कम दिखाई देता है। यानी सत्तारूढ़ पार्टी को बढ़त जरूर है, लेकिन मुकाबला अभी खुला हुआ है। पंजाब में बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

भगवंत मान की व्यक्तिगत लोकप्रियता AAP के लिए बड़ा फैक्टर

सर्वे का एक महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सामने आया। भगवंत मान को 40.1 फीसदी उत्तरदाताओं ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद बताया। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी 20.6 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि सुखबीर सिंह बादल को 11.7 फीसदी समर्थन मिला।

इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि भगवंत मान की व्यक्तिगत पहचान और AAP के समर्थन के बीच संबंध महत्वपूर्ण है। हालांकि, मुख्यमंत्री की लोकप्रियता और विधानसभा सीटों पर पार्टी के प्रदर्शन को एक ही चीज नहीं माना जा सकता। स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय मुद्दे और विपक्षी दलों की रणनीति भी चुनाव में भूमिका निभाएंगे।

पंजाब के मतदाताओं के बीच नशे की समस्या सबसे प्रमुख मुद्दों में बनी हुई है। India Today-CVoter सर्वे में 25.7 फीसदी लोगों ने ड्रग्स को राज्य की सबसे बड़ी चिंता बताया। इसके बाद बेरोजगारी और पलायन को 24.3 फीसदी लोगों ने प्रमुख मुद्दा माना।

यानी सरकार के लिए केवल कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। नशे और रोजगार जैसे मुद्दों पर जनता की धारणा भी चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है।

विपक्षी दल लगातार नशे के मुद्दे पर भगवंत मान सरकार को घेर रहे हैं। हाल ही में शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी नशे के खिलाफ अभियान के दौरान AAP सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं। ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

विधायकों से नाराजगी, लेकिन सरकार से तस्वीर अलग

पंजाब की राजनीति में एक दिलचस्प अंतर सर्वे में सामने आया। करीब 45.3 फीसदी लोगों ने अपने मौजूदा विधायक से असंतोष जताया, जबकि राज्य सरकार से असंतुष्ट लोगों का आंकड़ा 35.4 फीसदी रहा। करीब 40 फीसदी लोग सरकार के कामकाज से संतुष्ट बताए गए।

इसका मतलब यह है कि कुछ क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के खिलाफ नाराजगी AAP सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष में अभी पूरी तरह तब्दील नहीं हुई है। 2027 के चुनाव में टिकट वितरण और उम्मीदवारों का चयन इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

AAP के लिए एक और चुनौती पार्टी के अंदर सामने आ रहा असंतोष है। हालिया रिपोर्टों में कुछ विधायकों की ओर से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चर्चा हुई है। इससे चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता का सवाल उठता है।

इसके अलावा, अप्रैल 2026 में AAP के सात राज्यसभा सांसदों के BJP में जाने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। ऐसे घटनाक्रम पार्टी के राजनीतिक संगठन और चुनावी रणनीति के लिए चुनौती बन सकते हैं।

विपक्ष के पास चुनौती देने के लिए कई मुद्दे

कांग्रेस, BJP और अकाली दल अलग-अलग मुद्दों पर AAP सरकार को घेर रहे हैं। कांग्रेस सत्ता विरोधी माहौल पर जोर दे रही है, जबकि अकाली दल पंजाब की क्षेत्रीय पहचान और नशे के मुद्दे को प्रमुखता दे रहा है। BJP भी ड्रग्स और शासन से जुड़े सवालों पर AAP को निशाना बना रही है।

हालांकि विपक्ष के सामने अपनी अलग चुनौती है। अलग-अलग दलों के बीच वोटों का बंटवारा चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। जुलाई 2026 में राजनीतिक विश्लेषणों में भी पंजाब के मुकाबले को बहुकोणीय और अनिश्चित बताया गया था।

क्या भगवंत मान की वापसी तय मानी जा सकती है?

मौजूदा आंकड़ों के आधार पर ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। AAP को कुछ सर्वेक्षणों में बढ़त और भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद की पसंद में मजबूत स्थिति दिखाई गई है। दूसरी तरफ नशा, बेरोजगारी, पलायन, स्थानीय विधायकों से नाराजगी और पार्टी के भीतर असंतोष जैसे मुद्दे AAP के सामने मौजूद हैं।

इसके अलावा पंजाब के करीब 71.2 फीसदी मतदाताओं ने सर्वे में कहा कि उन्होंने अपना वोट तय कर लिया है। फिर भी चुनाव तक राजनीतिक घटनाक्रम, उम्मीदवारों का चयन, विपक्षी रणनीति और स्थानीय मुद्दे तस्वीर बदल सकते हैं।

इसलिए फिलहाल पंजाब की सियासत में सबसे सटीक तस्वीर यही है कि भगवंत मान और AAP के पास सत्ता में वापसी का मजबूत आधार दिखाई देता है, लेकिन इसे निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता। चुनावी मुकाबला वोटरों के स्थानीय मुद्दों और आने वाले महीनों की राजनीतिक गतिविधियों से काफी प्रभावित होगा।

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