2027 से पहले भगवंत मान की बड़ी रणनीति

मुफ्त बिजली से महिलाओं की योजना तक AAP का चुनावी दांव

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चंडीगढ़ , 05 अक्टूबर 2026 । पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी जहां अपने शासन के कामकाज और जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता के बीच ले जा रही है, वहीं कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए अपनी सरकार के रिकॉर्ड को चुनावी मुद्दे में बदलना महत्वपूर्ण होगा।

AAP सरकार ने मुफ्त बिजली और महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के तौर पर आगे बढ़ाया है। वहीं विपक्ष नशे, भ्रष्टाचार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहा है। इसलिए 2027 का चुनाव केवल एक योजना के भरोसे नहीं, बल्कि सरकार के पूरे प्रदर्शन और विपक्ष की रणनीति के बीच मुकाबले के रूप में सामने आएगा।

पंजाब में 90 फीसदी घरों में मुफ्त बिजली

पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में मुकाबला आम आदमी पार्टी बनाम विपक्ष है। कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव के केंद्र में भगवंत मान हैं और पूरी चुनावी राजनीति उनके इर्द-गिर्द ही घूम रही है। बीजेपी समेत विपक्ष दलों ने पंजाब में नशे को अभी से मुद्दा बना रखा है। भगवंत मान ने दिल्ली मॉडल के अंदाज में मुफ्त की योजनाओं की झड़ी लगा रखी है। सरकार में आने के बाद उन्होंने चुनावी वादा पूरा करते हुए मुफ्त बिजली स्कीम शुरू कर दी थी और आप को घर-घर तक पहुंचा दिया। आज पंजाब के करीब 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली दी जा रही है। इस चुनाव में यह तुरुप का इक्का बन सकती है।

महिलाओं के लिए मावां धीयां सतकार योजना

AAP सरकार ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सतकार योजना’ शुरू की है। जुलाई 2026 में योजना की शुरुआत करते हुए पात्र महिलाओं के खातों में शुरुआती किस्त के तौर पर तीन महीने की राशि ट्रांसफर की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य पात्र महिलाओं को ₹3,000 और अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹4,500 की राशि दी गई।

सरकार के लिए यह योजना महिला मतदाताओं से जुड़े सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को संबोधित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हालांकि कांग्रेस ने योजना लागू करने में हुई देरी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और बकाया राशि देने की मांग भी की है।

इसलिए योजना को लेकर सरकार की उपलब्धि और विपक्ष की आलोचना दोनों चुनावी बहस का हिस्सा हैं।

भगवंत मान के सामने विपक्ष का बड़ा हमला

पंजाब में विपक्षी दल सरकार को कई मुद्दों पर घेर रहे हैं। नशे की समस्या इनमें प्रमुख है। बीजेपी ने राज्यभर में ‘नशा मुक्त पंजाब’ अभियान चलाया है और AAP सरकार की नशे के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस भी सरकार पर शासन और वादों को लेकर निशाना साध रही है। दूसरी ओर AAP विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अपने शासन के काम और योजनाओं को सामने रख रही है।

इसके अलावा शिक्षा का मुद्दा भी हाल में चर्चा में आया, जब AAP विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर सवाल उठाए और बाद में पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। AAP ने उनके खिलाफ कार्रवाई को अनुशासन से जोड़ा, जबकि विपक्ष ने इसे सरकार के खिलाफ मुद्दा बनाया।

चुनाव से पहले सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि AAP के भीतर से उठने वाली आवाजें भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। हाल की रिपोर्टों में पूर्व AAP सांसद सुखवीर सिंह मैसरखाना के पार्टी से अलग होने और कुछ विधायकों की असहमति का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, इन घटनाओं से चुनावी परिणाम का कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पार्टी के भीतर असहमति और चुनावी प्रदर्शन दो अलग-अलग विषय हैं।

कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल की अलग-अलग रणनीति

पंजाब में विपक्षी दल फिलहाल अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियों के साथ मैदान में उतर रहे हैं। कांग्रेस ने परगट सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है और संगठन को चुनाव के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। बीजेपी ने नशामुक्ति अभियान के जरिए सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच बनाने की कोशिश शुरू की है। वहीं शिरोमणि अकाली दल ने 6 अक्टूबर से सभी 117 सीटों पर डोर-टू-डोर अभियान शुरू करने का फैसला किया है।

इससे साफ है कि चुनावी मैदान में कई दल अपनी अलग पहचान और मुद्दों के साथ जनता तक पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।

2022 की बड़ी जीत के बाद अब परीक्षा

2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP ने 117 में से 92 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल को तीन और बीजेपी को दो सीटें मिली थीं।

उस चुनाव में AAP ने भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा था और सरकार बनाई थी। अब 2027 का चुनाव उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के प्रदर्शन पर भी राजनीतिक बहस का केंद्र बनेगा।

पिछले चुनाव की तुलना में इस बार राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। सरकार के पास अपना शासन रिकॉर्ड है, जबकि विपक्ष के पास नशा, भ्रष्टाचार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे हैं।

हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के कुछ सहयोगियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI जांच शुरू हुई है। यह मामला भी चुनाव से पहले राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है। हालांकि जांच अभी जारी है और किसी व्यक्ति को आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।

AAP की ओर से केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि विपक्ष इन घटनाओं को सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है।

असली मुकाबला योजनाओं और मुद्दों के बीच

2027 के चुनाव में भगवंत मान सरकार के लिए मुफ्त बिजली, महिलाओं की आर्थिक सहायता और अन्य सरकारी योजनाएं प्रमुख उपलब्धियों के रूप में सामने रहेंगी। दूसरी तरफ विपक्ष नशे, भ्रष्टाचार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

ऐसे में चुनावी तस्वीर कई कारकों पर निर्भर करेगी—सरकार के कामकाज की जनता की धारणा, विपक्षी दलों की संगठनात्मक तैयारी, स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय मुद्दे और चुनावी गठजोड़। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पंजाब में 2027 का चुनावी मुकाबला शुरू हो चुका है और सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर रहे हैं।

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