पटना, 05 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने राज्य में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। LJP (रामविलास) ने यूपी में चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है और पार्टी का संगठन बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दे रहा है। चिराग पासवान ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है, जबकि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर चिराग पासवान की पार्टी NDA के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है, तो इसका बीजेपी के चुनावी समीकरण पर क्या असर हो सकता है? खासतौर पर दलित और युवा मतदाताओं के बीच LJP (रामविलास) की पहुंच को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है।
यूपी में पार्टी किसी भी स्थिति के लिए तैयार: चिराग
दरअसल चिराग पासवान ने हाल ही में बयान दिया था कि नागालैंड में लोजपा (रामविलास) अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ेगी। वहां पार्टी के दो विधायक हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर अभी बातचीत और संगठनात्मक स्तर पर तैयारी चल रही है। चिराग ने कहा कि पार्टी यूपी में किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहती है।
चिराग की नजर दलित और युवा वोटरों पर
उत्तर प्रदेश में LJP (रामविलास) की रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा दलित और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने का है। पार्टी के कार्यक्रमों में युवा संवाद और संगठन विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। हाल की रिपोर्टों में गैर-जाटव दलित समुदायों तक पहुंच बनाने की कोशिश का भी उल्लेख है।
चिराग पासवान ने यूपी के लिए ‘पंडित-पासी-पासवान’ जैसे सामाजिक समावेशन वाले फॉर्मूले की भी बात की है। पार्टी का दावा है कि वह अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी।
बीजेपी को कैसे मिल सकता है राजनीतिक लाभ?
LJP (रामविलास) के NDA के साथ चुनाव लड़ने की स्थिति में बीजेपी के लिए इसका महत्व खासतौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों में हो सकता है जहां पासवान और दूसरे गैर-जाटव दलित मतदाताओं की संख्या प्रभावी है। राजनीतिक रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि बीजेपी के पास यूपी में पासवान समुदाय के बड़े नेताओं की सीमित मौजूदगी है और चिराग इस कमी को कुछ हद तक पूरा करने वाले सहयोगी के रूप में देखे जा सकते हैं।
लेकिन इसका वास्तविक चुनावी असर सीट-दर-सीट सामाजिक समीकरण, उम्मीदवारों, स्थानीय संगठन और गठबंधन के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगा। इसलिए अभी यह कहना कि चिराग की एंट्री से बीजेपी को निश्चित तौर पर कितनी सीटों का फायदा होगा, तथ्यात्मक रूप से जल्दबाजी होगी।
NDA में सीट शेयरिंग सबसे अहम मुद्दा
यूपी में बीजेपी के अलावा NDA के कई सहयोगी दल भी विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। अपना दल (एस), निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल जैसे दलों की मौजूदगी के बीच LJP (रामविलास) की सीट मांग गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को और महत्वपूर्ण बनाती है।
सितंबर में कुछ मीडिया रिपोर्टों में LJP (रामविलास) के लिए करीब 10 सीटों के संभावित फॉर्मूले की चर्चा हुई थी, लेकिन इसे आधिकारिक सीट-बंटवारा समझना उचित नहीं है। पार्टी की ओर से अंतिम संख्या की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला
चिराग पासवान ने 4 अक्टूबर को कहा कि यूपी में पार्टी की भूमिका अभी तय नहीं हुई है और जरूरत पड़ने पर LJP (रामविलास) अकेले चुनाव लड़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य इकाई को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मतलब यह है कि पार्टी फिलहाल दोनों विकल्पों पर तैयारी कर रही है—NDA के साथ चुनाव लड़ना या परिस्थितियों के अनुसार अलग रास्ता अपनाना। गठबंधन का स्वरूप और सीटों की संख्या आगे होने वाली राजनीतिक बातचीत से स्पष्ट होगी।
2024 के बाद दलित वोटों का सवाल क्यों अहम?
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला था। बीजेपी का प्रदर्शन 2019 की तुलना में कमजोर हुआ, जबकि समाजवादी पार्टी ने कई सामाजिक समूहों के बीच अपना आधार बढ़ाया। इसी पृष्ठभूमि में NDA के भीतर सहयोगी दलों की भूमिका और दलित मतदाताओं तक पहुंच को लेकर चर्चा बढ़ी है।
LJP (रामविलास) इसी राजनीतिक स्पेस में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की चुनौती सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि यूपी में स्थायी संगठन और स्थानीय नेतृत्व तैयार करना भी है।
चिराग के लिए भी यूपी क्यों महत्वपूर्ण?
बिहार के बाहर संगठन विस्तार LJP (रामविलास) की राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। चिराग पासवान पहले ही यूपी के अलावा पंजाब और उत्तराखंड में भी पार्टी के विस्तार की बात कर चुके हैं।
यूपी देश का सबसे बड़ा विधानसभा राज्य है और यहां मजबूत संगठन खड़ा करने से पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक पहचान विस्तार देने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, चुनावी सफलता के लिए संगठन, उम्मीदवार चयन और स्थानीय सामाजिक समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि LJP (रामविलास) NDA के भीतर कितनी सीटों पर समझौता करती है और किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चिराग पासवान की पार्टी की यूपी में वास्तविक चुनावी भूमिका कितनी बड़ी होगी।