SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा टला

मेरठ-वाराणसी में Gen-Z से होना था संवाद

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मेरठ , 25  सितंबर 2026 । मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश का प्रस्तावित दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। उन्हें 25 सितंबर को मेरठ और 28 सितंबर को वाराणसी में Gen-Z यानी युवा मतदाताओं और छात्रों से संवाद करना था। मेरठ में निर्वाचक साक्षरता क्लब (ELC 2.0) और ECI-Net से जुड़ा कार्यक्रम भी प्रस्तावित था। हालांकि, दोनों कार्यक्रम अब टाल दिए गए हैं और नई तारीख की घोषणा नहीं हुई है।

मेरठ और वाराणसी में करना था संवाद

मेरठ में 25 सितंबर को सीईसी को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में जेन जी (Gen-Z) के साथ संवाद करना था। इसके बाद 28 सितंबर को वाराणसी में भी युवाओं से संवाद का कार्यक्रम था। मेरठ में होने वाले निर्वाचक साक्षरता क्लब (ELC 2.0) और ECI-Net में वेस्ट यूपी के शैक्षिक संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को शामिल होना था। वाराणसी के कार्यक्रम में भी युवाओं को निर्वाचन प्रक्रिया, डिजिटल माध्यमों और मतदाता सेवाओं की जानकारी देने की योजना थी।

निर्वाचन आयोग की ओर से युवाओं को चुनाव प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण और लोकतांत्रिक व्यवस्था की जानकारी देने के उद्देश्य से ELC 2.0 और ECI-Net से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मेरठ में 25 सितंबर को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कार्यक्रम प्रस्तावित था।

इसके बाद 28 सितंबर को वाराणसी में भी Gen-Z के साथ संवाद होना था। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी प्रस्तावित थी।

SIR को लेकर पहले से चर्चा

दौरा ऐसे समय स्थगित हुआ है जब चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस चल रही है। साथ ही आयोग के भीतर फैसलों को लेकर आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों की खबरें भी सामने आई हैं।

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने आयोग के कुछ फैसलों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। वहीं, आयोग से जुड़े अधिकारियों की ओर से इन मतभेदों की अलग व्याख्या सामने आई है और कहा गया है कि प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने दावा किया कि मेरठ में CEC के कार्यक्रम के दौरान विरोध की आशंका को लेकर खुफिया रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि SIR समेत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर युवाओं के सवालों के कारण कार्यक्रम में असहज स्थिति पैदा होने की आशंका थी।

हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि चुनाव आयोग ने दौरा स्थगित करने की ऐसी वजह आधिकारिक रूप से नहीं बताई है। इसलिए खुफिया रिपोर्ट और संभावित विरोध को कार्यक्रम स्थगित होने का निश्चित कारण बताना अभी उचित नहीं होगा।

आयोग की ओर से क्या कहा गया?

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव को सामान्य प्रक्रिया बताया। अधिकारी के मुताबिक, वेन्यू की उपलब्धता, वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम और प्राकृतिक कारणों समेत कई वजहों से कार्यक्रमों की तारीख बदली जा सकती है।

यानी फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में CEC के यूपी दौरे को स्थगित करने की कोई एक निश्चित वजह सामने नहीं आई है।

Gen-Z से संवाद का मकसद क्या था?

निर्वाचन आयोग पिछले कुछ समय से युवाओं के बीच चुनावी साक्षरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ELC के माध्यम से विद्यार्थियों को मतदाता पंजीकरण, मतदान, मतगणना और चुनाव आयोग की भूमिका जैसी प्रक्रियाओं की जानकारी देने की पहल की जा रही है।

आयोग की ओर से पहले आयोजित कार्यक्रमों में भी CEC ने युवाओं को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी हासिल करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।

युवाओं के सवालों का मुद्दा क्यों अहम?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची और SIR से जुड़े मुद्दे सार्वजनिक चर्चा में हैं। ऐसे में Gen-Z के साथ सीधे संवाद के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, सुधार कराने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठने की संभावना स्वाभाविक थी।

कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने भी कार्यक्रम स्थगित होने के समय पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, कार्यक्रम स्थगित करने की आधिकारिक वजह अभी स्पष्ट नहीं होने के कारण इससे जुड़े अलग-अलग दावों को अंतिम निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

नई तारीख का इंतजार

मेरठ और वाराणसी के दोनों कार्यक्रम फिलहाल स्थगित हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक नई तारीख अभी तय नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि CEC ज्ञानेश कुमार का Gen-Z के साथ संवाद कब और किस प्रारूप में होगा।

फिलहाल इस घटनाक्रम का संबंध SIR को लेकर चल रही बहस और आयोग के भीतर सामने आई चर्चाओं के बीच जरूर देखा जा रहा है, लेकिन कार्यक्रम स्थगित करने का आधिकारिक कारण सामने आने तक इसे किसी एक वजह से जोड़ना सावधानी के बिना उचित नहीं होगा।

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