नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026 । गैंगस्टर नीरज सहरावत उर्फ नीरज बवानिया गुरुवार को छह घंटे की कस्टडी पैरोल पर दिल्ली के हरि नगर स्थित अपने घर पहुंचा। वह तिहाड़ जेल नंबर-2 से दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन की कस्टडी में घर लाया गया था। इस दौरान स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया था।
नीरज बवानिया अपनी पत्नी और नवजात बच्चों से मिलने के लिए घर पहुंचा था। घर के बाहर मौजूद मीडिया से बातचीत के दौरान उसने अपने खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि उसके मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। यह उसकी ओर से किया गया दावा है, जबकि उसके खिलाफ लंबित मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी है।
स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच के अलावा लोकल पुलिस का भी भारी बंदोबस्त था। इस सबके बीच ‘दिल्ली के दाऊद’ कहे जाने वाले नीरज ने मीडिया के सामने कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और पुलिस देखती रह गई।
नवजात बच्चों से मिलने के लिए मिली कस्टडी पैरोल
नीरज बवानिया ने अपने नवजात बच्चों से मिलने के लिए अदालत से राहत मांगी थी। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे बच्चों से मिलने के लिए सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल की अनुमति दी थी। रिपोर्टों के अनुसार उसकी पत्नी ने अगस्त में तीन बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से एक की मौत हो गई थी और दो बच्चों को अस्पताल में उपचार की जरूरत थी।
इसी पारिवारिक परिस्थिति को लेकर बवानिया ने अंतरिम जमानत की भी मांग की थी। इस मामले में अदालत ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था।
बवानिया को जेल से घर तक लाने के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच के साथ स्थानीय पुलिस की टीमें भी मौके पर मौजूद थीं। सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे निर्धारित अवधि के लिए परिवार से मिलने की अनुमति दी गई।
भारी सुरक्षा व्यवस्था का कारण उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि और उससे जुड़े मामलों को बताया गया है। दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार नीरज बवानिया से जुड़े कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। दिल्ली में संगठित अपराध से जुड़े गिरोहों की पुलिस की सूची में भी नीरज बवानिया-नवीन बाली सिंडिकेट का उल्लेख किया गया है।
मीडिया के सामने कानूनी प्रक्रिया पर सवाल
घर पहुंचने के दौरान मीडिया कैमरों के सामने नीरज बवानिया ने अपने मामलों को लेकर नाराजगी जताई। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उसने आरोप लगाया कि कानून उसका साथ नहीं दे रहा और उसके मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। उसने बच्चों को देखते हुए राहत नहीं मिलने की बात भी कही।
इन बयानों को बवानिया का पक्ष माना जाना चाहिए। उनके आरोपों के संबंध में संबंधित जांच एजेंसियों या अदालत के रिकॉर्ड से अलग निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नीरज बवानिया पर हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी समेत कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। 2023 की एक रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से उसके खिलाफ 40 से अधिक मामलों का उल्लेख किया गया था। उसी रिपोर्ट के अनुसार उसे एक MCOCA मामले में अन्य आरोपियों के साथ बरी किया गया था।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ कुल 24 मामले बताए गए हैं, जिनमें से कुछ में वह बरी हो चुका है और कुछ मामलों में सजा काट चुका है। शेष मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
हाई-रिस्क कैदी के तौर पर भी हुआ है उल्लेख
नीरज बवानिया की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सत्र अदालत ने उसे हाई-रिस्क कैदी मानते हुए राहत देने से इनकार किया था। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्चों से मिलने के लिए सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल की अनुमति दी थी।
फिलहाल बवानिया के मामलों में अदालतों के सामने चल रही कानूनी प्रक्रिया ही आगे की स्थिति तय करेगी। कस्टडी पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद उसे वापस जेल ले जाया गया।