DTC ड्राइवरों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी

बसें नहीं चलीं तो बेहाल हुए यात्री; वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं संभाल पाई हालात

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नई दिल्ली, 19  सितंबर 2026 । दिल्ली में DTC बस ड्राइवरों की हड़ताल का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। 15 सितंबर से शुरू हुई हड़ताल के तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में बसें सड़कों पर नहीं उतरीं। इससे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में यात्रियों को बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा और कई लोगों को मेट्रो, ऑटो, ई-रिक्शा और कैब जैसे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।

डिपो से बस लेकर निकले लेकिन…

गुरुवार देर रात इसे लेकर आदेश भी जारी हुआ, मगर शुक्रवार को जब वह डिपो पहुंचे तो उन्हें हड़ताल करने वाले ड्राइवरों ने रोक दिया। कई जगह ड्राइवर तीसरे दिन भी डिपो से बस लेकर निकले, लेकिन अपना ट्रिप पूरा नहीं कर पाए।

90 फीसदी से ज्यादा बसें प्रभावित

हड़ताल के तीसरे दिन हालात इस हद तक बिगड़े कि रिपोर्टों के अनुसार 90 फीसदी से ज्यादा बसें या तो डिपो में खड़ी रहीं या डिपो से निकलने के बाद वापस लौट गईं। अधिकांश प्रमुख डिपो में बसों का परिचालन प्रभावित हुआ।

इसका सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ा जिनके इलाकों में मेट्रो की सीधी कनेक्टिविटी नहीं है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और रोजाना बस से सफर करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय और ज्यादा किराया खर्च करना पड़ा।

डीटीसी अधिकारियों की चली लंबी बैठक

हड़ताल को लेकर शुक्रवार को डीटीसी अधिकारियों की लंबी बैठक चली। निजी संचालकों को भी बुलाया गया और हड़ताल खत्म करने के लिए प्रयास तेज करने के निर्देश दिए। हालांकि वेतन बढ़ोतरी को लेकर अभी भी असमंजस बना हुआ है। सरकार फिलहाल इस हड़ताल पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। सूत्रों ने बताया कि शनिवार सुबह फिर एक बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे क्या होगा इसपर भी फैसला लिया जाएगा।

ऑटो-ई-रिक्शा और कैब पर बढ़ा दबाव

DTC बसों की संख्या घटने के साथ ही यात्रियों ने ऑटो, ई-रिक्शा, बाइक कैब और ऐप आधारित कैब का सहारा लिया। इससे वैकल्पिक परिवहन साधनों पर दबाव बढ़ा और कई यात्रियों को बस के मुकाबले अधिक किराया देना पड़ा।

ऐसे यात्रियों की मुश्किल ज्यादा रही जिन्हें लंबी दूरी के लिए एक से अधिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ा।

वैकल्पिक ड्राइवरों से बसें चलाने की कोशिश

हड़ताल लंबी खिंचने के बाद DTC ने वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार शुरू किया। अधिकारियों ने हड़ताल में शामिल नहीं हुए ड्राइवरों और उपलब्ध कर्मचारियों के जरिए बसों को सड़कों पर उतारने की कोशिश की। हालांकि DTC के पास सभी बसों को सामान्य तरीके से चलाने के लिए पर्याप्त संख्या में ड्राइवर उपलब्ध नहीं हैं।

19 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार DTC ने सेवा बहाल करने के लिए 2,693 कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों को अस्थायी रूप से अलग-अलग डिपो में तैनात करने का आदेश भी जारी किया। इसके बावजूद कई रूटों पर बसों की कमी और यात्रियों की परेशानी बनी रही।

कब तक जारी रहेगी हड़ताल?

ड्राइवरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक वे हड़ताल खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं सरकार और DTC की ओर से परिचालन सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

ऐसे में राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। यदि विवाद का समाधान जल्द नहीं हुआ तो दिल्ली के उन इलाकों में यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है, जहां DTC बसें रोजाना आवागमन का प्रमुख साधन हैं।

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