अमेरिका-ईरान जंग के बीच न्यूयॉर्क जाएंगे राष्ट्रपति पेजेशकियान

UN महासभा में शामिल होने को अमेरिका ने दी मंजूरी

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वॉशिंगटन डीसी/तेहरान, 18 सितंबर 2026। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष और तनाव के बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अगले सप्ताह न्यूयॉर्क जाएंगे। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के शीर्ष अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए वीजा देने की मंजूरी दे दी है। इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल होंगे।

अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से जंग चल रही है। इसके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA बैठक में शामिल होंगे।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि दोनों नेताओं को वीजा दे दिया गया है। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार होगा, जब ईरान के शीर्ष नेता अमेरिका पहुंचेंगे।

बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका में ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान की गिरफ्तारी हो सकती है?

UN महासभा में शामिल होगा ईरानी प्रतिनिधिमंडल

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ईरान के ‘कोर डेलीगेशन’ को संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी है और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत भी रुक-रुककर चल रही है।

रिपोर्टों के मुताबिक इस बार ईरानी प्रतिनिधिमंडल पिछले साल की तुलना में छोटा होगा। हालांकि, राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री अराघची जैसे प्रमुख अधिकारियों को न्यूयॉर्क जाने की अनुमति दी गई है।

अमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने के साथ ही कई प्रतिबंध भी लागू किए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि प्रतिनिधिमंडल पर यात्रा संबंधी सीमाएं लागू रहेंगी और उन्हें लग्जरी तथा कुछ अन्य सामान खरीदने की अनुमति नहीं होगी।

अमेरिका पहले भी ईरानी राजनयिकों की न्यूयॉर्क में आवाजाही को सीमित करता रहा है। ऐसी पाबंदियों के तहत उनकी यात्रा मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन, ईरानी राजदूत के आवास और जेएफके एयरपोर्ट तक सीमित रही है।

जंग के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?

पेजेशकियान का न्यूयॉर्क दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच संघर्ष के साथ-साथ परमाणु कार्यक्रम और रणनीतिक जलमार्गों को लेकर भी गंभीर मतभेद बने हुए हैं।

ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र महासभा दोनों पक्षों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना पक्ष रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। ईरानी राष्ट्रपति यहां अपने देश का पक्ष रख सकते हैं, जबकि अमेरिका भी अपनी विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखेगा।

अमेरिका का यह निर्णय संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में उसकी जिम्मेदारियों से भी जुड़ा है। 1947 के UN Headquarters Agreement के तहत अमेरिका सामान्य तौर पर संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में हिस्सा लेने वाले विदेशी राजनयिकों को पहुंच उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। हालांकि, अमेरिका सुरक्षा, आतंकवाद और विदेश नीति से जुड़े आधारों पर वीजा को लेकर कुछ अधिकार अपने पास रखता है।

ईरान के बाद फिलिस्तीनी अधिकारियों पर अलग फैसला

ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अनुमति देने का फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी प्रशासन ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए वीजा देने से इनकार किया है। अमेरिका ने इस फैसले के लिए फिलिस्तीनी प्राधिकरण की अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष से जुड़े उसके कदमों को आधार बताया है।

इस तरह एक ही संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए ईरानी अधिकारियों को अनुमति और फिलिस्तीनी अधिकारियों पर रोक का अमेरिकी फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

न्यूयॉर्क दौरे पर दुनिया की नजर

ईरानी राष्ट्रपति का न्यूयॉर्क दौरा सिर्फ संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण तक सीमित नहीं माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच पेजेशकियान की मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, इस दौरे से किसी संभावित समझौते या युद्धविराम का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।

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