नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026। दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव की नामांकन प्रक्रिया को लेकर बुधवार को विवाद खड़ा हो गया। कॉलेज में अध्यक्ष और CR पदों के लिए दाखिल छह नामांकन रद्द किए जाने के बाद नाराज छात्रों ने प्रिंसिपल कार्यालय का घेराव किया। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और नामांकन रद्द करने के फैसले पर सवाल उठाए। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई।
दरअसल, DUSU के तहत कॉलेजों में चुनाव के लिए नॉमिनेशन प्रक्रिया चल रही है। कॉलेज में अध्यक्ष और CR पदों के लिए 6 छात्रों ने नॉमिनेशन दाखिल किए थे। ग्रीवांस कमिटी के मुताबिक, हर प्रत्याशी को 1 लाख रुपये का श्योरिटी बॉन्ड भी देना था, ताकि डिफेसमेंट होने पर गारंटर से वसूली की जा सके। कमिटी के अनुसार, छात्रों ने बॉन्ड पर गारंटर की जगह खुद हस्ताक्षर किए थे, जो लिंगदोह नियमों के तहत गलत है। हाई कोर्ट के निर्देश पर यह बॉन्ड अनिवार्य किया गया है।
छह छात्रों के नामांकन रद्द होने से बढ़ा विवाद
DUSU और कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के तहत दयाल सिंह कॉलेज में अध्यक्ष और CR पदों के लिए छह छात्रों ने नामांकन दाखिल किए थे। नामांकन की जांच के बाद इन सभी को रद्द कर दिया गया। इसके बाद कॉलेज परिसर में छात्र विरोध जताने के लिए जुटने लगे।
छात्रों की ओर से सवाल उठाया गया कि नामांकन रद्द करने से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी और प्रक्रिया स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताई गई। विरोध के दौरान छात्रों ने प्रिंसिपल ऑफिस का घेराव किया और नारेबाजी की।
श्योरिटी बॉन्ड बना नामांकन रद्द होने की वजह
कॉलेज की ग्रीवांस कमिटी के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए एक लाख रुपये का श्योरिटी बॉन्ड जमा करना जरूरी था। इसका उद्देश्य चुनाव प्रचार के दौरान कॉलेज परिसर में डिफेसमेंट या संपत्ति को नुकसान होने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत गारंटर से राशि की वसूली करना है।
कमिटी के मुताबिक, संबंधित छह उम्मीदवारों ने बॉन्ड में गारंटर के स्थान पर खुद ही हस्ताक्षर कर दिए। कॉलेज प्रशासन ने इसे निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं माना और इसी आधार पर नामांकन रद्द किए गए।
लिंगदोह नियमों का दिया गया हवाला
नामांकन रद्द करने के मामले में कॉलेज की ओर से लिंगदोह कमिटी की चुनाव संबंधी गाइडलाइन का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद चुनाव प्रक्रिया में श्योरिटी बॉन्ड को अनिवार्य किया गया है।
कॉलेज की ग्रीवांस कमिटी का कहना है कि बॉन्ड में गारंटर की भूमिका उम्मीदवार से अलग व्यक्ति की होनी चाहिए। वहीं, छात्रों के विरोध का मुख्य कारण यह है कि छह नामांकन रद्द होने से उनके चुनाव लड़ने के अधिकार पर असर पड़ा है।
नामांकन रद्द होने की जानकारी सामने आने के बाद छात्रों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी छात्र प्रिंसिपल कार्यालय के बाहर पहुंचे और काफी देर तक नारेबाजी करते रहे।
स्थिति को देखते हुए पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी और बातचीत के बाद प्रदर्शन शांत हुआ। फिलहाल विवाद का केंद्र नामांकन प्रक्रिया और श्योरिटी बॉन्ड से जुड़े नियम बने हुए हैं।
DUSU चुनाव के बीच कैंपस में बढ़ी हलचल
दिल्ली विश्वविद्यालय में DUSU और कॉलेज छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया के बीच अलग-अलग कॉलेजों में छात्र मुद्दों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। दयाल सिंह कॉलेज में नामांकन रद्द होने का मामला इसी चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा है।
इस घटनाक्रम ने चुनाव नियमों की जानकारी, नामांकन जांच और उम्मीदवारों के लिए जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है। अब छात्रों की नजर इस बात पर है कि कॉलेज प्रशासन नामांकन रद्द किए जाने को लेकर आगे क्या कदम उठाता है।