नई दिल्ली, 09 सितंबर2026 । दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी की इमारत गिरने से जान गंवाने वाले 19 वर्षीय अर्पित जाज के परिवार का दर्द हर किसी को झकझोर रहा है। मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले अर्पित दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम सेकेंड ईयर के छात्र थे और सीए की तैयारी भी कर रहे थे। बेटे को खोने के बाद उनके पिता भूपेंद्र ने दूसरे अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए दिल्ली भेजने से पहले उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहें।
अपने 19 साल के बेटे अर्पित को खोने वाले पिता भूपेंद्र ने कहा, ‘आइंदा अपने बच्चों को दिल्ली न भेजें। दिल्ली ने मेरा सपना चूर-चूर कर दिया।’ बेटे की मौत के दर्द के बीच परिवार ने उसकी कॉर्निया दान कर दी ताकि उसकी आंखों से कोई और इस दुनिया को देख सके। मध्य प्रदेश के रहने वाले अर्पित दिल्ली में पीजी में रह रहे थे। वह एआरएसडी कॉलेज में बीकॉम सेकेंड ईयर के छात्र थे और सीए की तैयारी भी कर रहे थे। अर्पित के बड़े सपने थे।
रविवार को ही दिल्ली लौटा था अर्पित
रिपोर्ट के मुताबिक अर्पित रक्षाबंधन के बाद अपने घर देवास गया था और हादसे से कुछ समय पहले ही दिल्ली लौटा था। उसने परिवार को दिल्ली पहुंचने की जानकारी भी दी थी। इसके बाद सत्य निकेतन की पीजी इमारत ढह गई और अर्पित मलबे में दब गया। जब परिवार का उससे संपर्क नहीं हुआ तो परिजन दिल्ली पहुंचे और बाद में उन्हें उसके निधन की खबर मिली।
अर्पित पढ़ाई में आगे बढ़ने और सीए की तैयारी कर अपने करियर को मजबूत बनाने के सपने देख रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा होगा, लेकिन हादसे ने महज 19 साल की उम्र में उसकी जिंदगी खत्म कर दी।
दुख की घड़ी में परिवार ने किया नेत्रदान
बेटे की मौत के बाद भी परिवार ने ऐसा फैसला लिया जिसने मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की। अर्पित के परिवार ने उसकी कॉर्निया दान कर दीं। रिपोर्टों के अनुसार, इस नेत्रदान से जरूरतमंद लोगों को दृष्टि मिलने की संभावना है। परिवार का कहना था कि अर्पित भले ही दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी आंखों के जरिए किसी और की जिंदगी में रोशनी आ सकती है।
इतने बड़े सदमे के बीच नेत्रदान का फैसला लेना परिवार के लिए आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने बेटे की याद को एक सकारात्मक अर्थ देने की कोशिश की। अर्पित के पिता का यह फैसला हादसे की भयावहता के बीच इंसानियत की एक अलग तस्वीर सामने लाता है।
पीजी और छात्रों की सुरक्षा पर फिर सवाल
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरे शहरों से दिल्ली आने वाले हजारों छात्र किराए के कमरों, पीजी और हॉस्टलों में रहते हैं। ऐसे में इमारत की मजबूती, मंजिलों की अनुमति, निकासी व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
अर्पित के परिवार की त्रासदी अब इस बड़े सवाल को सामने ला रही है कि क्या छात्रों के लिए इस्तेमाल हो रही ऐसी इमारतों की नियमित जांच होती है और क्या नियमों का पालन नहीं करने वालों पर समय रहते कार्रवाई की जाती है।
अर्पित की आंखों से किसी और की जिंदगी में रोशनी
अर्पित के परिवार के लिए यह हादसा कभी न भरने वाला जख्म है। लेकिन नेत्रदान के फैसले ने उसके जाने के बाद भी उसकी एक निशानी को जिंदा रखने की उम्मीद दी है। परिवार का यह कदम बताता है कि गहरे दुख के बीच भी किसी दूसरे इंसान के जीवन को बेहतर बनाने की सोच संभव है।
सत्य निकेतन की इस त्रासदी में अर्पित की कहानी सिर्फ एक छात्र की मौत की कहानी नहीं है। यह उन माता-पिता की चिंता भी सामने लाती है जो अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और करियर के लिए घर से दूर भेजते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऐसी घटनाओं के बाद व्यवस्था कब तक सिर्फ जांच और कार्रवाई तक सीमित रहेगी और छात्रों की सुरक्षा के लिए ठोस बदलाव कब होंगे।