चंडीगढ़, 05 सितंबर2026 । पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के दौरान विरोध करने वाले एक ग्रामीण के साथ कथित पुलिस ज्यादती का मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य के सीधे-सादे गांववालों के साथ आतंकियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर ग्रामीणों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
हरसिमरत कौर ने लगाए आरोप
हरसिमरत कौर बादल ने आरोप लगाया कि आप जानते हैं उन्होंने उसे कैसे चुप कराने की कोशिश की? उसे करंट लगाकर, उसे बुरी तरह पीटकर, उसकी पगड़ी उतारकर और उसकी दाढ़ी के साथ बदसलूकी करके। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के आदेश पर उनके सिख भाई की गरिमा पर हमला किया गया। यह अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि अकाली दल इस लड़के और उसके परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है और उसके ठीक होने के लिए हरसंभव मदद करेगा। हम इस मामले को कोर्ट में भी ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम पंजाब हैं और हम इस तरह की तानाशाही को स्वीकार नहीं करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
मामला संगरूर जिले के शेरों गांव का है, जहां 2 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, गांव के रहने वाले 37 वर्षीय मोहंजीत सिंह ने नशे के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए एक छत से काला झंडा दिखाया और नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया।
धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा विवाद
मामले ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया पैदा की है। एसजीपीसी ने मोहंजीत सिंह के साथ कथित प्रताड़ना और उसके केश तथा ककारों के अपमान के आरोपों पर चिंता जताई है। इससे मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक अधिकारों और मानवाधिकार से जुड़े सवाल भी उठने लगे हैं।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
हरसिमरत कौर बादल और सुखबीर सिंह बादल समेत विपक्षी नेताओं ने घटना को लेकर पंजाब सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार से सवाल पूछने या विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है। हरसिमरत ने ग्रामीणों के साथ कथित व्यवहार को लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
मामले में पुलिस जांच शुरू होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि हिरासत के दौरान वास्तव में क्या हुआ। पुलिस के दावों और मोहंजीत सिंह की शिकायत के बीच कई बिंदुओं की जांच की जानी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है।
नशे के मुद्दे से जुड़ा विरोध
पूरे विवाद की शुरुआत पंजाब में नशे की समस्या को लेकर हुए विरोध से हुई। मोहंजीत सिंह का कहना है कि वह नशे के खिलाफ आवाज उठाता रहा है और मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर सवाल करना चाहता था। ऐसे में यह मामला पंजाब सरकार की नशा-विरोधी मुहिम, विरोध के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई—तीनों को लेकर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।