सोनीपत, 03 सितंबर2026 । जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) तैयार कर किसान की करोड़ों रुपये की जमीन बेच दी गई। इतना ही नहीं, जमीन के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक से करीब 50 करोड़ रुपये का लोन लेने का भी आरोप है। मामले ने जमीन की खरीद-बिक्री में दस्तावेजों की जांच और बैंकिंग प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।
शिकायत के अनुसार इसी कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉनों के आधार पर रामानंद शर्मा ने 9 जून 2005 को जमीन चमन लाल के नाम बेच दी। जमीन की बिक्री के बाद रामानंद और चमन लाल ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर जमीन को एस. बी. आई. की चांदनी चौक शाखा में गिरवी रख दिया। इसके आधार पर बैंक से करीब 50 करोड़ रुपए का ऋण भी लिया गया। थाने में सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट पहुंचा किसान
फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप
आरोप के मुताबिक, जालसाजों ने किसान की जमीन पर अधिकार दिखाने के लिए फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की। इसके आधार पर जमीन के मालिकाना हक और बिक्री से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए। कथित तौर पर असली जमीन मालिक को इसकी जानकारी दिए बिना जमीन को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
मामले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन का सौदा करने का आरोप है। ऐसे मामलों में फर्जी हस्ताक्षर, पहचान संबंधी दस्तावेज और रजिस्ट्री रिकॉर्ड का दुरुपयोग किए जाने की आशंका रहती है। जांच के दौरान इन सभी दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
करोड़ों की जमीन बेचने के बाद बैंक से लोन
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जमीन को कथित तौर पर बेचने के बाद उसी संपत्ति और उससे जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक से 50 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के लिए किया गया। इससे यह सवाल भी उठता है कि बैंक में लोन प्रक्रिया के दौरान संपत्ति के वास्तविक मालिकाना हक और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर तक किया गया।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल जमीन की धोखाधड़ी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों, संपत्ति के दुरुपयोग और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं की जांच हो सकती है।
किसान को कब हुई फर्जीवाड़े की जानकारी?
बताया जा रहा है कि जमीन के साथ हुए इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने के बाद किसान ने संबंधित अधिकारियों और पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर जमीन के दस्तावेजों, पावर ऑफ अटॉर्नी, रजिस्ट्री और बैंक से लिए गए लोन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।
जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना अहम होगा कि फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी किसने तैयार की, जमीन की बिक्री में कौन-कौन लोग शामिल थे और बैंक से लोन लेने की प्रक्रिया में किन लोगों ने दस्तावेज उपलब्ध कराए।
रजिस्ट्री और बैंक रिकॉर्ड की जांच अहम
ऐसे मामले में जमीन की मूल रजिस्ट्री, पावर ऑफ अटॉर्नी, बिक्री विलेख, स्टांप रिकॉर्ड, बैंक लोन दस्तावेज और संबंधित खातों की जांच से पूरी कड़ी सामने आ सकती है। अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि जमीन के दस्तावेजों का इस्तेमाल कितनी बार किया गया और कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये की रकम किन खातों में पहुंची।
मामले में शामिल लोगों की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस या जांच एजेंसी आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है। वहीं, बैंक से जुड़े अधिकारियों और संपत्ति के मूल्यांकन तथा दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया की भी जांच किए जाने की संभावना है।
जमीन मालिकों के लिए बड़ा सबक
यह मामला जमीन के दस्तावेजों की सुरक्षा और नियमित सत्यापन की जरूरत को भी सामने लाता है। जमीन मालिकों को समय-समय पर अपने संपत्ति रिकॉर्ड की जांच करते रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध पावर ऑफ अटॉर्नी, रजिस्ट्री या लेनदेन की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित विभाग और पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी। फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से लेकर जमीन की बिक्री और फिर बैंक से 50 करोड़ रुपये के कथित लोन तक की पूरी प्रक्रिया की जांच इस मामले की सबसे अहम कड़ी होगी।