नई दिल्ली: संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर अभिनेता स्वरा भास्कर की पुरानी आपत्ति एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में एक कार्यक्रम में स्वरा ने फिल्म के जौहर वाले दृश्य को याद करते हुए सवाल उठाया कि इस तरह का चित्रण यौन हिंसा से बचे लोगों तक किस तरह का संदेश पहुंचा सकता है। उनके बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।
विवाद बढ़ने के बाद स्वरा ने स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अनुवाद और अर्थ निकाला जा रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने न तो रानी पद्मावती को कायर कहा और न ही उन महिलाओं के साहस पर सवाल उठाया, जिन्होंने जौहर किया था। उनके अनुसार, उनकी आपत्ति फिल्म में जौहर के चित्रण और उससे निकलने वाले संदेश को लेकर है।
स्वरा ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि उनकी चिंता इस बात पर केंद्रित थी कि यदि किसी महिला के साथ बलात्कार हो जाए, तो क्या उसके बाद भी उसके पास सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का पूरा अधिकार है। उनका तर्क है कि किसी महिला के साथ हुई यौन हिंसा उसके जीवन का मूल्य कम नहीं करती और न ही उसे आगे जीने के अधिकार से वंचित करती है।
यह विवाद नया नहीं है। वर्ष 2018 में ‘पद्मावत’ की रिलीज के बाद स्वरा ने निर्देशक संजय लीला भंसाली को एक खुला पत्र लिखा था। उस पत्र में उन्होंने फिल्म के जौहर दृश्य पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें चिंता है कि इसे देखने वाला दर्शक महिलाओं के सम्मान को उनकी यौनिकता से जोड़कर देख सकता है। उनके पत्र की एक पंक्ति सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही और बाद में पूरी बहस का केंद्र बन गई।
अब, वर्षों बाद जब स्वरा ने उसी मुद्दे को दोबारा उठाया, तो सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए। आलोचकों का कहना है कि जौहर को केवल आधुनिक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, मध्यकालीन युद्ध और आक्रमण के दौर में महिलाओं के सामने परिस्थितियां बेहद अलग थीं और जौहर को उन ऐतिहासिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझना चाहिए।
दूसरी ओर, स्वरा के तर्क का समर्थन करने वाले लोग कहते हैं कि किसी ऐतिहासिक घटना को फिल्म में दिखाते समय उसके सामाजिक संदेश पर भी सवाल किया जा सकता है। उनके अनुसार, आज के दर्शक के लिए यह महत्वपूर्ण है कि यौन हिंसा का शिकार हुई महिला को दोष, शर्म या मृत्यु से नहीं, बल्कि जीवन और सम्मान के अधिकार से जोड़ा जाए।
स्वरा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके हालिया बयान को रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी के रूप में पेश करना गलत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर वायरल छोटे क्लिप या अनुवाद के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय उनका पूरा बयान सुना जाए।
‘पद्मावत’ विवाद इस बात का उदाहरण है कि इतिहास, सिनेमा और आधुनिक सामाजिक मूल्यों के बीच टकराव कितना जटिल हो सकता है। एक तरफ जौहर से जुड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्मृतियां हैं, तो दूसरी तरफ आज के समय में महिलाओं के जीवन, गरिमा और अधिकारों को लेकर बदलती समझ है। स्वरा भास्कर का बयान इसी पुराने विवाद को एक बार फिर सामने ले आया है।