हरियाणा, 02 सितंबर2026 । आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संगठनों की हड़ताल के चलते रोहतक से लेकर यमुनानगर तक कई जगहों पर आयुष्मान कार्ड के जरिए होने वाले उपचार और ऑपरेशन प्रभावित होने की खबर है। इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कई लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ रही है।
फतेहाबाद में आयुष्मान भारत योजना के तहत 23 अस्पताल पैनल में शामिल है। लेकिन किसी में भी उपचार नहीं किया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि आधे अस्पतालों में उपचार जारी रहा है। अलग-अलग बीमारियों के करीब 20 ऑपरेशन टाले गए हैं। हिसार में ढंदूर गांव निवासी एक पिता अपने 30 वर्षीय बेटे की डायलिसिस के लिए भटकता रहा। आयुष्मान कार्ड लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचा एक पोता भी अपने दादा की कीमोथैरेपी के लिए धक्के खाता नजर आया। जिले में 84 निजी अस्पतालों के 250 करोड़ रुपये छह माह से अटके हुए हैं।
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। गंभीर बीमारियों और सर्जरी जैसी महंगी चिकित्सा सेवाओं में यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनती है। ऐसे में योजना से जुड़े अस्पतालों में सेवाएं प्रभावित होने का सीधा असर मरीजों पर पड़ सकता है।
हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो रही है, जिनकी सर्जरी पहले से निर्धारित थी। ऑपरेशन टलने की स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को नई तारीख या दूसरे अस्पताल की तलाश करनी पड़ सकती है। गंभीर मरीजों के लिए उपचार में देरी चिंता का विषय बन सकती है, हालांकि प्रत्येक मरीज की स्थिति और उपचार की आवश्यकता अलग होती है।
अस्पतालों और संबंधित संगठनों की ओर से आयुष्मान योजना के तहत भुगतान और अन्य मांगों को लेकर असंतोष जताया जाता रहा है। अस्पतालों का तर्क रहता है कि इलाज के बाद भुगतान में देरी या पैकेज दरों से जुड़ी समस्याओं का असर अस्पतालों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। वहीं सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने योजना की सेवाओं को लगातार जारी रखने और अस्पतालों की शिकायतों का समाधान करने की चुनौती रहती है।
रोहतक और यमुनानगर जैसे जिलों में सेवाओं पर असर की खबर के बाद मरीजों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है। जिन लोगों ने आयुष्मान कार्ड के आधार पर इलाज की योजना बनाई थी, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि संबंधित अस्पताल में योजना के तहत कौन-कौन सी सेवाएं उपलब्ध हैं और हड़ताल के दौरान मरीजों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह का व्यवधान मरीजों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। खासकर सर्जरी, आपातकालीन उपचार और नियमित फॉलोअप पर निर्भर मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी है। इसलिए सरकार, अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संगठनों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालना महत्वपूर्ण होगा।
अब निगाह इस बात पर है कि हड़ताल कब तक जारी रहती है और आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों में सामान्य सेवाएं कब बहाल होती हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता है, तो लंबित ऑपरेशन और इलाज का दबाव बढ़ सकता है। मरीजों की परेशानी कम करने के लिए वैकल्पिक अस्पतालों और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत होगी।