नई दिल्ली, 01 सितंबर2026 । स्कूल में अनुशासन के नाम पर छात्रा के साथ कथित प्रताड़ना का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि किताब नहीं लाने पर बच्ची को सजा के तौर पर धूप में खड़ा किया गया और बाद में कमरे में बंद कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि शिक्षक के इस व्यवहार से बच्ची मानसिक रूप से परेशान हो गई और धीरे-धीरे डिप्रेशन में चली गई।
- स्कूल के बाहर सोमवार सुबह परिवार वालों और अभिभावकों की भीड़ ने प्रदर्शन किया।
- इस दौरान पुलिस भी वहां पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की।
- बच्ची की मां का आरोप है कि कुछ टीचर्स उसे परेशान करते थे।
- 22 जुलाई को उसे जब सजा दी गई तो वह बदहवास हो गई। बच्ची बच्चों ने टीचर को बताया तो उन्होंने उसे रूम में बंद कर दिया।
- तबियत और बिगड़ी तब भी स्कूल वालों ने उसे अस्पताल नहीं पहुंचाया।
- इसके बाद वह डिप्रेशन में चली गई। बिलखती मां का कहना है कि बच्ची के साथ टॉर्चर किया गया है।
- उसके बीमार होने के बावजूद न तो स्कूल से कोई उसे देखने आया, न ही परिवार से बात की। घटना वाले दिन वह 7 बजे स्कूल गई थी।
- 9:30 बजे टीचर ने कॉल किया कि वह बीमार है, मगर उसे अस्पताल नहीं ले गए।
परिजनों के मुताबिक, बच्ची ने कथित तौर पर स्कूल में उसके साथ हुए व्यवहार को लेकर परेशानी जाहिर की थी। परिवार का आरोप है कि शिक्षक की प्रताड़ना का उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा। स्थिति बिगड़ने के बाद बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षक के खिलाफ गंभीर सवाल उठाए हैं।
मामले ने स्कूलों में बच्चों के साथ अनुशासन के नाम पर होने वाले व्यवहार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का कहना है कि पढ़ाई से जुड़ी छोटी गलती के लिए बच्चों को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि बच्ची को जिस तरह कथित तौर पर सजा दी गई, उससे वह मानसिक दबाव में आ गई।
अब इस मामले में जांच और कार्रवाई की मांग उठ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूल में बच्ची के साथ वास्तव में क्या हुआ, क्या उसे धूप में खड़ा किया गया और कमरे में बंद किया गया, तथा उसके बाद उसकी मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
यह घटना स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षकों के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अभिभावकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।