नई दिल्ली, 01 सितंबर2026 । दिल्ली में निजी स्कूलों से जुड़ी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्राइवेट स्कूलों के लिए जमीन की न्यूनतम आवश्यकता संबंधी शर्त को खत्म किए जाने से नए स्कूल खोलने और मौजूदा स्कूलों के विस्तार का रास्ता आसान हो सकता है। सरकार के इस फैसले का असर खासतौर पर उन संस्थानों पर पड़ने की उम्मीद है, जो जमीन की उपलब्धता और निर्धारित न्यूनतम क्षेत्रफल की बाध्यता के कारण स्कूल शुरू करने या विस्तार करने में परेशानी का सामना कर रहे थे।
- शिक्षा निदेशक ने 26 अगस्त को जारी आदेश में कहा है कि स्कूलों को एफिलिएशन के लिए संबंधित बोर्ड, जैसे CBSE या अन्य बोर्ड, के नियमों का पालन करना होगा।
- जमीन से जुड़े नियम भी संबंधित बोर्ड के मानकों के अनुसार तय होंगे।
- शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि मान्यता मिलने के बावजूद स्कूलों को दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियमों, बच्चों के निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून समेत अन्य जरूरी नियमों का पालन करना होगा।
वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री ने विद्यालयों को लेकर एक बड़ा वादा किया है। सरकार का फोकस स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल, आधुनिक सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के लिए जरूरी संसाधनों को मजबूत करने पर है। सरकार के मुताबिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बुनियादी ढांचे के साथ-साथ स्कूलों की कार्यक्षमता और सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
जमीन की न्यूनतम शर्त हटने के बाद निजी क्षेत्र की स्कूल शिक्षा में भागीदारी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, स्कूलों के संचालन के लिए सुरक्षा, भवन मानकों, अग्निशमन व्यवस्था, स्वच्छता, विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त सुविधाओं और अन्य नियामकीय नियमों का पालन जरूरी रहेगा। ऐसे में सरकार का यह फैसला शिक्षा क्षेत्र में विस्तार और नियमन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में खुलेंगे मेडिकल रूम
दिल्ली सरकार के स्कूलों में मेडिकल रूम खोली जाएगी। सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसकी घोषणा की। सरकार के अनुसार स्कूली स्टूडेंट्स की सुरक्षा, प्राइमरी केयर और उनके पूरे स्वास्थ्य को बेहतर व मजबूत करने के मकसद से मेडिकल रूम खोलने का फैसला लिया गया है।
मुख्यमंत्री के विद्यालयों को लेकर किए गए वादे और जमीन संबंधी नियमों में बदलाव को दिल्ली की शिक्षा नीति में अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में इन फैसलों का असर नए स्कूलों की स्थापना, मौजूदा स्कूलों के विस्तार और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं पर दिखाई दे सकता है।