हरियाणा , 29 अगस्त 2026 । भारतीय जनता पार्टी में बिप्लब कुमार देब की आक्रामक और स्पष्ट राजनीतिक शैली को पार्टी के लिए एक अहम ताकत के तौर पर देखा जा रहा है। हालिया चुनावी जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका और संगठन को मजबूत करने की क्षमता ने उनके कद को और बढ़ाया है। पश्चिम बंगाल में भी पार्टी ने उन्हें अहम चुनावी जिम्मेदारी दी थी, जहां कठिन मानी जाने वाली कई सीटों पर BJP के प्रदर्शन की चर्चा हुई।
बिप्लब के प्रति यह विश्वास उनका पार्टी के प्रति समर्पण और उनके द्वारा किए गए राजनीति में किए गए लंबे संघर्ष का परिणाम है। त्रिपुरा में वामपंथी किले को ध्वस्त कर कमल खिलाने से लेकर दिल्ली के राष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिकाएं निभाने तक, उनका सफर राजनीतिक संघर्ष, प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक प्रबंधन की अनूठी मिसाल रहा है। बिप्लब देब राष्ट्रीय राजनीति में एक ऐसे ‘ट्रबलशूटर’ और रणनीतिकार के रूप में उभरे हैं, जो केवल चुनावी अभियान की औपचारिकता नहीं निभाते, बल्कि अंतिम बूथ तक जीत की उम्मीद पैदा करते हैं।
2018 का त्रिपुरा विधानसभा चुनाव भारतीय राजनीति के इतिहास में एक बड़े मोड़ के रूप में दर्ज हुआ। बिप्लब देब के आक्रामक और सुव्यवस्थित नेतृत्व में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 25 साल लंबे कम्युनिस्ट शासन का अंत किया। इस ऐतिहासिक सफलता ने न केवल पूर्वोत्तर में भाजपा की पकड़ मजबूत की, बल्कि बिप्लब देब को एक राष्ट्रीय रणनीतिकार के रूप में स्थापित कर दिया। त्रिपुरा में पार्टी की पहली सरकार बनाने और उसकी नींव मजबूत करने का श्रेय निर्विवाद रूप से बिप्लब देब को जाता है।
बिप्लब देब की राजनीति में खास तौर पर जमीनी संगठन, कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क और विपक्ष के खिलाफ आक्रामक तेवर नजर आते हैं। 2018 में त्रिपुरा में BJP को लंबे वामपंथी शासन के बाद सत्ता तक पहुंचाने में उनकी भूमिका ने उन्हें पार्टी के प्रमुख संगठनात्मक नेताओं में स्थापित किया। अब पार्टी की कोशिश उनकी इसी छवि और अनुभव का इस्तेमाल दूसरे राज्यों में भी राजनीतिक विस्तार के लिए करने की हो सकती है।
युवाओं के बीच पकड़ मजबूत करना BJP की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रोजगार, विकास, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर देब की मुखर शैली युवा मतदाताओं के बीच पार्टी के संदेश को ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाने में मदद कर सकती है। हालांकि, उनकी ‘फायरब्रांड’ छवि का राजनीतिक लाभ कितना व्यापक होगा, यह अलग-अलग राज्यों के स्थानीय समीकरण और मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।