चंडीगढ़, 29 अगस्त 2026 । पंजाबी सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर मंजीत कौर की इलाज के दौरान मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। आरोप है कि 3 जुलाई की रात उन्हें चंडीगढ़ के सेक्टर-34 से अगवा कर मोरिंडा ले जाया गया, जहां मारपीट के बाद पेड़ से बांधकर आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसी मंजीत का करीब 54 दिनों तक इलाज चला और 26 अगस्त को PGIMER चंडीगढ़ में उनकी मौत हो गई।
होश में आने पर भी दर्ज नहीं किए बयान
मामले में पंजाब पुलिस की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मृतका की मां ने आरोप लगाया कि मंजीत ने पीजीआई में इलाज के दौरान अपने बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस को बुलाया था। पीजीआई चौकी ने खरड़ सदर थाना पुलिस को भी सूचना दी थी कि वह बयान देने की स्थिति में है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी को फोन पर सूचना दिए जाने के बावजूद वह अस्पताल नहीं पहुंचे। पीजीआई चौकी में इस संबंध में डीडीआर दर्ज होने की बात भी बात कही। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 3 जुलाई की घटना के बाद करीब दो महीने तक पंजाब पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला क्यों दर्ज नहीं किया।
मंजीत की मां की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने अब अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस सेक्टर-34 से मोरिंडा तक के रास्ते की CCTV फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की तलाश कर रही है। मामले में पुलिस की कथित लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि घटना के बाद लंबे समय तक हत्या के प्रयास का केस दर्ज नहीं हुआ था।
परिवार के मुताबिक, मंजीत को 5 अगस्त को होश आया था और उन्होंने अपने साथ हुई घटना के बारे में जानकारी दी थी। अब पुलिस घटना की वजह, आरोपियों की भूमिका और पहले हुई कार्रवाई में देरी समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
चंडीगढ़ की एसएसपी ने क्या बताया
पुलिस यह भी जांच करेगी कि मोरिंडा अस्पताल, मैक्स अस्पताल और पीजीआई ने मंजीत कौर के मामले की सूचना संबंधित पुलिस को दी थी या नहीं। अगर सूचना दी गई थी तो पुलिस ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने कहा कि मां की शिकायत मिलते ही अपहरण और हत्या का केस दर्ज किया गया है। आरोपों की जांच जारी है और सीसीटीवी समेत सभी तथ्यों को खंगाला जा रहा है।