चंडीगढ़ , 27 अगस्त 2026 । हरियाणा सरकार के फंड से जुड़े कथित 661 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों के बीच कथित मिलीभगत की जांच की जा रही है। CBI ने हरियाणा कैडर के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।
इन 6 IAS अफसरों के खिलाफ तैयार हो रही चार्जशीट
CBI की जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर जिन 6 IAS अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार की जा रही है, उनमें:
- विनीत गर्ग
- पंकज अग्रवाल
- मोहम्मद शाइन
- डॉ. साकेत कुमार
- आर. के. सिंह
- प्रदीप दहिया (सेवानिवृत्त)
इनमें से 3 IAS अफसरों—पंकज अग्रवाल, आर. के. सिंह और प्रदीप दहिया को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, विनीत गर्ग, मोहम्मद शाइन और डॉ. साकेत कुमार के ठिकानों पर सीबीआई की टीम सर्च ऑपरेशन चलाकर जांच कर चुकी है।
सरकारी फंड की हेराफेरी का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित घोटाले में हरियाणा सरकार के कई विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े संस्थानों की रकम को बैंक खातों के जरिए गलत तरीके से ट्रांसफर किए जाने की आशंका है। CBI इस बात की जांच कर रही है कि सरकारी धन को कथित तौर पर किस तरह डायवर्ट किया गया और इसमें अधिकारियों तथा बैंक कर्मचारियों की क्या भूमिका रही।
कई IAS अधिकारी जांच के दायरे में
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। CBI ने जून में तीन हरियाणा-कैडर IAS अधिकारियों और एक IFS अधिकारी से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी खातों से हुए संदिग्ध लेनदेन में अधिकारियों की किसी तरह की भूमिका या लापरवाही थी या नहीं। किसी अधिकारी का जांच के दायरे में होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच में
661 करोड़ रुपये के कथित फंड डायवर्जन मामले में बैंक अधिकारियों और बाहरी लोगों के बीच संभावित सांठगांठ की भी जांच की जा रही है। CBI को संदेह है कि सरकारी धन को ट्रांसफर करने के लिए बैंक खातों और वित्तीय प्रक्रियाओं का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
मामला सामने आने के बाद बैंक ने भी अनधिकृत लेनदेन की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने हरियाणा सरकार को 578 करोड़ रुपये की मूल राशि और ब्याज वापस किया था।
CBI के सामने कई सवाल
जांच में अब यह पता लगाना अहम है कि कथित फंड डायवर्जन की पूरी साजिश कैसे काम करती थी, किन अधिकारियों या कर्मचारियों ने नियमों को दरकिनार किया और रकम आखिर कहां गई। CBI वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के संपर्कों की भी जांच कर रही है।
661 करोड़ रुपये के इस मामले ने सरकारी फंड की निगरानी और बैंकिंग व्यवस्था में नियंत्रण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपों और संबंधित अधिकारियों की वास्तविक भूमिका की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।