बिना NEET और मेडिकल डिग्री के बने ‘डॉक्टर’, 10–15 लाख रुपये लेकर फर्जी दस्तावेजों का खेल उजागर
लखनऊ, 05 अगस्त 2026 । देश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े एक बड़े कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ लोग बिना NEET परीक्षा पास किए और बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई किए ही खुद को डॉक्टर के रूप में पेश कर रहे थे। आरोप है कि 10 से 15 लाख रुपये लेकर फर्जी डिग्रियां, जाली प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए, जिनके आधार पर चिकित्सा क्षेत्र में अवैध रूप से काम करने की कोशिश की गई।
बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार राय ने सीएम योगी को चार पन्नों का पत्र भेजकर मामले की सीबीआई जांच करवाने के साथ ही फर्जीवाड़े में शामिल बोर्ड के अफसरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उपाध्यक्ष की तरफ से कई जिलों के पते पर हुए फर्जी रजिस्ट्रेशन के नंबर और आवेदकों के नाम भी सीएम को भेजे गए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र और मेडिकल योग्यता से जुड़े दस्तावेज तैयार किए जाते थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल थे, फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल किन संस्थानों या अस्पतालों में किया गया। मामले से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बिना वैध मेडिकल डिग्री और आवश्यक पंजीकरण के डॉक्टर के रूप में कार्य करता है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा हो सकता है। इसलिए मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान यह भी सत्यापित किया जा रहा है कि कथित फर्जी डिग्रियों का उपयोग कहां-कहां किया गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को इलाज कराने से पहले डॉक्टर का पंजीकरण और योग्यता सत्यापित करनी चाहिए। वहीं, मेडिकल शिक्षा और पंजीकरण प्रणाली में पारदर्शिता तथा नियमित सत्यापन ऐसे मामलों पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।