पटना, 05 अगस्त 2026 । बिहार की प्रमुख नदियों के प्रवाह को लेकर सामने आई एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य की कई नदियां धीरे-धीरे अपना रुख बदल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गंगा नदी दक्षिण दिशा की ओर जबकि कोसी नदी पश्चिम की ओर खिसकने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिवर्तन प्राकृतिक भू-आकृतिक (Geomorphological) प्रक्रियाओं, तलछट (Sediment) के जमाव, कटाव, बाढ़ और जल प्रवाह में लंबे समय से हो रहे बदलावों का परिणाम हो सकता है।
गंगा और कोसी का बदलाव खतरे की आहट
एक अखबार के अनुसार रिसर्च की ये रिपोर्ट बता रही है कि गंगा नदी धीरे-धीरे झारखंड की सीमा यानी दक्षिण की ओर खिसक गई है। अब इसकी रेंज में भागलपुर शहर आ गया है। वहीं कोसी नदी का प्रवाह या बदलाव तेजी के साथ पश्चिम दिशा की तरफ जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक ये बदलाव नदी के भीतर यानी तल में सिल्ट के जमा होने, कटाव होने और बाढ़ की वजह से ऐसा हो रहा है। डर है कि आगे इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बाढ़, कटाव और उपजाऊ कृषि भूमि की बर्बादी का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार की नदियों के मार्ग में बदलाव का असर आसपास के गांवों, कृषि भूमि, तटबंधों और बुनियादी ढांचे पर पड़ सकता है। नदी का प्रवाह बदलने से कुछ क्षेत्रों में कटाव बढ़ने की आशंका रहती है, जबकि अन्य स्थानों पर नई भूमि का निर्माण भी हो सकता है। विशेष रूप से कोसी नदी, जिसे लंबे समय से अपने बदलते मार्ग के कारण “बिहार का शोक” कहा जाता है, अतीत में भी कई बार अपना रास्ता बदल चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा और कोसी जैसी बड़ी नदियों के प्रवाह में होने वाले बदलावों की नियमित निगरानी आवश्यक है। इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण और हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन की मदद ली जाती है। इन अध्ययनों के आधार पर संभावित कटाव, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और नदी प्रबंधन की योजनाएं तैयार की जाती हैं, ताकि जन-धन की हानि को कम किया जा सके।
जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि नदी के मार्ग में परिवर्तन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक वर्षा, तलछट के बढ़ते जमाव और मानवीय हस्तक्षेप जैसी परिस्थितियां इसकी गति और प्रभाव को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में वैज्ञानिक अध्ययन, समय पर निगरानी और प्रभावी नदी प्रबंधन नीति बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।