‘भाजपा परिवार जागते रहो, सावधान रहो, रात अंधेरी है’— प्रशांत किशोर का तीखा सियासी तंज

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पटना, 04 अगस्त 2026 । बांकीपुर उपचुनाव के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा राजनीतिक तंज कसते हुए कहा, “भाजपा परिवार जागते रहो, सावधान रहो, रात अंधेरी है।” उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी संकेतों को लेकर भाजपा के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

भाजपा के लिए आठ महीने में सब कुछ बदल गया

अब भाजपा, प्रशांत किशोर के वेकअप कॉल को किस तरह लेगी? क्या भाजपा मान रही है कि पीके अब उसके लिए एक गंभीर चुनौती बन गये हैं? भाजपा भले खुद को निडर दिखाने की कोशिश करे लेकिन अंदर ही अंदर वह सदमे में है। किसी किले का ध्वस्त होना राजा के असुरक्षित होने का संदेश है। बांकीपुर की हार से भाजपा सन्नाटे में है। सिर्फ आठ महीने में सब कुछ बदल गया। भाजपा के वरिष्ठ और मजबूत नेता भी अब फीके नजर आ रहे हैं।

नितिन नवीन और रामकृपाल के बूथ पर भी भाजपा पिछड़ी

बांकीपुर के विधायक रहे नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना कर उन्हें बहुत बड़ी प्रोन्नति दी गयी थी। बांकीपुर की जनता के लिए तो ये बहुत खुशी की बात थी। नितिन नवीन आशान्वित भी थे कि क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता बरकरार है। लेकिन उपचुनाव हुआ तो भाजपा के कट्टर समर्थकों ने भी नितिन नवीन से मुंह फेर लिया। नितिन नवीन जिस बूथ पर वोट डालते हैं वहां भाजपा को 88 तो प्रशांत किशोर को 152 वोट मिले। भाजपा का कोई नेता वोटरों का मूड नहीं भांप सका। रामकृपाल यादव को भी भाजपा में बड़ा यादव फेस माना जाता है। उनके बूथ पर भी भाजपा को 89 तो प्रशांत किशोर को 91 वोट मिले। भाजपा के बड़े नेता भी अपने बूथ पर पार्टी उम्मीदवार को बढ़त नहीं दिला सके। कमल संकट में तो है।

प्रशांत किशोर ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में चुनावी नतीजे केवल जीत और हार तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे जनता के बदलते राजनीतिक रुझानों का भी संकेत देते हैं। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को जनता की अपेक्षाओं, स्थानीय मुद्दों और बदलते जनमत को गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि यदि दल समय रहते जनता की भावनाओं को नहीं समझेंगे, तो भविष्य के चुनावों में उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में किसी भी दल के लिए आत्ममंथन और संगठन को लगातार मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर का यह बयान आगामी चुनावों से पहले विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों के बीच सियासी बहस को और तेज कर सकता है। हालांकि, भाजपा की ओर से इस टिप्पणी पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

बिहार की राजनीति में बांकीपुर उपचुनाव के बाद लगातार बयानबाजी का दौर जारी है। विभिन्न राजनीतिक दल चुनावी नतीजों की अपनी-अपनी तरह से व्याख्या कर रहे हैं और इन्हें आगामी चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर का यह बयान भी राज्य की राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

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