आरा , 20 जून् 2026 । बिहार के भोजपुर में बढ़ती पुलिस कार्रवाइयों और हालिया एनकाउंटर मामलों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। आरा से सांसद ने अपने पिता, भाई और एक स्थानीय मुखिया के खिलाफ दर्ज FIR का हवाला देते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में कानून व्यवस्था के नाम पर “एनकाउंटर राज” चलाया जा रहा है और विरोधी आवाजों को दबाने की कोशिश हो रही है।
भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में युवक के परिजन और ग्रामीण पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन पुलिस की ओर से सड़क जाम करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और हथियार लहराकर माहौल बिगाड़ने के आरोप में युवक के पिता, भाई और पंचायत के मुखिया समेत अन्य को नामजद बनाते हुए केस दर्ज किया है।
सांसद का कहना है कि उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के खिलाफ दर्ज मामलों के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक कार्रवाई निष्पक्ष होने के बजाय चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने के लिए की जा रही है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानून के दायरे में और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामले तथ्यों और जांच के आधार पर दर्ज किए जाते हैं, न कि राजनीतिक दबाव में।
हथियार फेंक कर सरेंडर करने पर भी मुठभेड़
मृतक युवक के पिता का दावा है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने हथियार फेंक दिया था और सरेंडर कर दिया था। इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी के खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और जानबूझकर उसे निशाना बनाया गया।
इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दल सरकार पर पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले कानून व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा बिहार की राजनीति में प्रमुख विषय बन सकता है। ऐसे में सांसद के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।