शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: कॉलेजों में रात 8 बजे तक चलेंगी कक्षाएं, CM सम्राट चौधरी ने दिया सुझाव

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बिहार , 19 जून्‌ 2026 । उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुझाव सामने आया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कॉलेजों में कक्षाओं का समय बढ़ाकर रात 8 बजे तक संचालित करने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि इससे शैक्षणिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और अधिक संख्या में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

यह कॉलेज बिहार के प्रथम उपमुख्यमंत्री रहे दिवंगत अनुग्रह नारायण सिंह के नाम पर है, जिनकी जयंती भी गुरुवार को थी। कॉलेज की प्राचार्य रत्ना अमृत की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ”मैंने अभी उनसे पूछा कि आपके संस्थान में कक्षाएं कितने बजे तक चलती हैं। उन्होंने बताया कि दोपहर दो बजे के बाद परिसर लगभग खाली हो जाता है। मुझे इसमें एक अवसर दिखाई देता है। मेरा कहना है कि कक्षाएं रात आठ बजे तक चलनी चाहिए।” उन्होंने कहा, ”कृपया यह न समझें कि मैं केवल भाषण दे रहा हूं। हम ऐसा ढांचा तैयार करना चाहते हैं जिससे यह संभव हो सके। हमारे बच्चे उच्च शिक्षा के लिए पंजाब और महाराष्ट्र जैसे दूर-दराज के राज्यों में जाते हैं। हमें अपनी उच्च शिक्षा व्यवस्था को इतना मजबूत बनाना होगा कि उनकी जरूरतें बिहार में ही पूरी हो सकें।”

सम्राट चौधरी ने कहा कि कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचे का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। यदि कक्षाओं का संचालन सुबह से लेकर शाम और रात तक चरणबद्ध तरीके से किया जाए तो अधिक छात्रों को प्रवेश और पढ़ाई की सुविधा मिल सकती है। साथ ही शिक्षण संस्थानों की क्षमता का भी बेहतर इस्तेमाल होगा।

इस प्रस्ताव के तहत नियमित पाठ्यक्रमों के अलावा व्यावसायिक, तकनीकी और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के लिए भी अलग-अलग समय स्लॉट निर्धारित किए जा सकते हैं। इससे नौकरीपेशा युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

हालांकि इस सुझाव को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। शिक्षकों और छात्र संगठनों का कहना है कि देर रात तक कक्षाएं चलाने से सुरक्षा, परिवहन और छात्र-छात्राओं की सुविधा जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देना होगा। खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की व्यवस्था लागू की जाती है तो इसके लिए पर्याप्त परिवहन सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां सुनिश्चित करनी होंगी। फिलहाल यह एक सुझाव है और इसे लागू करने को लेकर संबंधित विभागों तथा शैक्षणिक संस्थानों के स्तर पर विचार-विमर्श किया जा सकता है।

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