UP पुलिस का ऑपरेशन क्लीन: 9 साल में 17 हजार मुठभेड़, 289 दुर्दांत अपराधी ढेर… मेरठ जोन सबसे आगे

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लखनऊ , 19 मई 2026 । उत्तर प्रदेश में अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन क्लीन” को लेकर बड़े आंकड़े सामने आए हैं। राज्य में पिछले 9 वर्षों के दौरान करीब 17 हजार पुलिस मुठभेड़ होने का दावा किया गया है, जिनमें 289 दुर्दांत अपराधी मारे गए। इस अभियान में मेरठ जोन सबसे आगे बताया जा रहा है, जहां सबसे अधिक एनकाउंटर और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई दर्ज की गई है।

एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। बयान के अनुसार, इस अवधि में पुलिस के साथ मुठभेड़ की कुल 17,043 घटनाएं हुईं, जिनमें 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसमें बताया गया है कि इन मुठभेड़ में कुल 11,834 अपराधी घायल हुए। इस दौरान अपराधियों से मोर्चा लेते वक्त 18 पुलिसकर्मी शहीद और 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए।

उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, राज्य सरकार की अपराध और माफिया के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत लगातार कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि इन अभियानों के चलते कई बड़े गैंग कमजोर हुए हैं और संगठित अपराध पर नियंत्रण पाने में मदद मिली है। बड़ी संख्या में अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि हजारों बदमाश पुलिस कार्रवाई में घायल भी हुए।

मेरठ जोन को इस अभियान का सबसे सक्रिय क्षेत्र माना जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से सक्रिय गैंगस्टर, बदमाश और वांछित अपराधियों के खिलाफ यहां लगातार अभियान चलाए गए। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि कार्रवाई के कारण हत्या, लूट, फिरौती और गैंगवार जैसी घटनाओं में कमी आई है।

हालांकि, पुलिस एनकाउंटर को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने कई मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग की है। आलोचकों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों का पालन भी जरूरी है। वहीं सरकार और पुलिस इन कार्रवाइयों को अपराध नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम बता रहे हैं।

प्रदेश सरकार का कहना है कि अपराधियों में कानून का डर पैदा करना जरूरी था और इसी वजह से संगठित अपराध के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाया गया। कई माफियाओं की संपत्तियां भी जब्त की गईं और अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई की गई।

राजनीतिक और कानूनी हलकों में यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थकों का मानना है कि सख्त कार्रवाई से अपराध पर नियंत्रण हुआ, जबकि विरोधी इसे लेकर सवाल उठाते रहे हैं। आने वाले समय में भी यूपी पुलिस की यह रणनीति बहस और राजनीति के केंद्र में बनी रह सकती है।

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